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एक दिन छोड़कर भी गंदा पानी

bhaskar news | Aug 04, 2012, 08:42AM IST
 
 

ग्वालियर. पीने के पानी को लेकर शहरवासियों की परेशानी दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। लोगों को एक दिन छोड़कर पानी मिल रहा है, वह भी गंदा और दरुगधयुक्त। बुधवार रात को लक्ष्मीगंज, जागृति नगर, संजय नगर, तारागंज आदि क्षेत्रों के नलों में काला व दरुगधयुक्त पानी आया।

एक दिन छोड़कर पानी मिलने के चलते लोगों को गंदा पानी ही भरना पड़ा। वहीं उपनगर ग्वालियर के मैदाई मोहल्ला और चार बाबा क्षेत्र रानीपुरा के लोग भी गंदा पानी पीने को मजबूर हैं। यहां भी पेयजल सप्लाई के दौरान नलों में गंदा पानी आ रहा है।

दरअसल, सीवर चेंबर व नाले-नालियों के पास बिछी पेयजल सप्लाई की लाइनों में लीकेज के कारण लोगों के घरों में गंदे पानी की सप्लाई हो रही है। इस समस्या की जानकारी नगर निगम प्रशासन को भी है परंतु अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की गई हैं। नगर निगम प्रशासन की इस लापरवाही का खामियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है।

गंदे पानी से हो चुकी है मौत

एक साल पहले जती की लाइन में नलों में आया गंदा पानी पीने से दो बालिकाओं की मौत हो गई थी। इसके बाद भी हालात नहीं सुधरे। इस क्षेत्र के लोग आज भी गंदे पानी से परेशान हैं।

इन क्षेत्रों में ज्यादा है परेशानी

उपनगर ग्वालियर के मैदाई मोहल्ला व चार बाबा क्षेत्र रानीपुरा के निवासियों का कहना है कि वे लंबे समय से इस समस्या का सामना कर रहे हैं। कुछ इलाकों में नलों से सीवर का पानी ही निकल रहा है, लेकिन इसके बाद भी सुनवाई नहीं हो रही।

लश्कर में आज नहीं होगी पेयजल सप्लाई

तिघरा स्थित नए वाटर फिल्ट्रेशन प्लांट में शुक्रवार को इलेक्ट्रिक फॉल्ट आने के कारण शनिवार को लश्कर दक्षिण क्षेत्र में पानी की सप्लाई नहीं हो पाएगी।

यहां आएगी परेशानी

प्लांट में आई खराबी के कारण गोरखी की नई व पुरानी, अवाड़पुरा पार्क व पहाड़ी, निंबाजी की खोह, सिकंदर कंपू व गजराराजा क्षेत्र की टंकियां नहीं भर पाई हैं। इस कारण महाराज बाड़ा, माधौगंज, चिटनिस की गोठ, रॉक्सी के आस-पास का क्षेत्र, सिकंदर कंपू, हेमसिंह की परेड, अवाड़पुरा, गुढ़ा, नादरिया की माता, चौरसिया कॉलोनी, निंबाजी की खोह आदि क्षेत्रों में पेयजल सप्लाई नहीं होगी।

डेढ़ करोड़ खर्च फिर भी समस्या

पिछले साल रक्षा अनुसंधान एवं स्थापना विकास के विशेषज्ञों की ओर से यह खुलासा किया गया कि शहर में सीवरयुक्तपानी सप्लाई हो रहा है। इसके बाद निगम प्रशासन ने पूरे शहर में लगभग डेढ़ सौ ऐसे स्पॉट तलाशे थे, जहां सीवर और पानी की लाइनें साथ-साथ थीं। इन लाइनों को शिफ्ट करने के लिए 1.46 करोड़ रुपए खर्च किए गए। लेकिन समस्या बरकरार है।
 
 
 

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