ग्वालियर.तू भी क्या याद करेगा, किसी रईस से पाला पड़ा है। यह कहते हुए फल कारोबारी संतोष राठौर को डकैतों ने फिरौती लिए बिना ही रिहा कर दिया। चार दिन पहले मोहना-आरौन के बीच से अपहृत हुआ युवक गुरुवार की रात लगभग दो बजे अपने परिजनों के साथ मोहना थाने पहुंच गया।
शुक्रवार को दिनभर पुलिस अपहृत को लेकर जंगल में डकैत गैंग के ठिकानों को ढूंढती रही, लेकिन सफलता नहीं मिली। दरअसल, डकैतों के मुखबिर ने बता दिया था कि जिस व्यक्ति को वे पकड़े बैठे हैं, उसके घर में फांके की स्थिति है, वह बीस लाख रुपए की फिरौती नहीं दे पाएगा।
मोहना में जड़ी-बूटी और फल का कारोबार करने वाला संतोष राठौर (30), 19 दिसंबर की सुबह मोहना से आरौन के लिए जड़ी-बूटी लेने के लिए निकला था। इसके बाद वह लौटकर घर नहीं पहुंचा। शाम को उसके भाई वीरेंद्र के मोबाइल फोन पर अपहरण की सूचना आ गई। डकैतों ने उसे छोड़ने की एवज में बीस लाख रुपए की फिरौती मांगी थी।
युवक के अपहरण के बाद से ही पुलिस रमपुरा, बन्हेरी और सनकुआं के जंगलों में सर्चिग कर रही थी। बुधवार की रात को पुलिस ने फायरिंग भी की थी। संतोष ने पुलिस को बताया कि गोलियों की आवाज ने डकैतों को डरा दिया था।
जो व्यक्ति डकैतों को खाना पहुंचाने आता था, उससे इन लोगों ने पूछा भी था कि पुलिस की घेराबंदी कैसी है। डकैतों के मुखबिर ने बताया कि पुलिस ने चारों ओर घेराबंदी कर रखी है। इसके अलावा उन्होंने जिस व्यक्ति को पकड़ा है, वह गरीब है और ज्यादा फिरौती नहीं दे सकता है।
इसके बाद गुरुवार की रात को डकैतों ने जंगल में खड़े होकर संतोष को हाईवे का रास्ता दिखा दिया। संतोष हाईवे पर पहुंचा, इसके बाद अपने घर, फिर अपने पिता और भाई को लेकर मोहना थाने पहुंच गया। शुक्रवार की दोपहर सर्चिग के दौरान पुलिस ने अपहृत संतोष की बाइक भी जंगल से बरामद कर ली।
इन डकैतों ने किया था अपहरण:फल कारोबारी का अपहरण पच्चीस हजार रुपए के इनामी डकैत इंदर आदिवासी, पंद्रह हजार के इनामी मुन्ना, रामजी आदिवासी ने किया था।
डकैत, फल कारोबारी से फिरौती तो नहीं ले पाए, लेकिन उसकी जेब में रखे बारह हजार रुपए ले गए। डकैत इंदर पहले राजेंद्र गट्टा गिरोह का सदस्य रहा था। गट्टा की मौत के बाद उसने अपना गिरोह बना लिया। संतोष, मुन्ना के चाचा कल्ला से जड़ी-बूटी लेने के लिए जाते थे और एक बार में दस-बारह हजार रुपए की जड़ी-बूटियां खरीद लाते थे। इस बात की जानकारी कल्ला ने मुन्ना को दी और मुन्ना ने अपने साथियों से मिलकर वारदात को अंजाम दे दिया।
मुझे गरीब जानकर छोड़ दिया
॥मैं आरौन में जड़ी-बूटी खरीदने के लिए जा रहा था। इसी दौरान चार बदमाशों ने मुझे बंदूक दिखाई और धमकाते हुए जंगल के अंदर ले गए। इसके बाद मेरे मोबाइल फोन से मेरे भाई को फोन करके फिरौती की मांग की।
जो व्यक्ति डकैतों के पास खाने का सामान लेकर आता था, उसने दो दिन पहले डकैतों को बताया कि पुलिस ने घेराबंदी कर ली है तथा जिस व्यक्ति को पकड़ा है, वह भी फिरौती देने लायक नहीं है। इसके बाद डकैतों ने मुझे गरीब जानकर छोड़ दिया। इन लोगों ने मेरे साथ मारपीट भी नहीं की थी, बस मेरी जेब में रखे बारह हजार रुपए छीन लिए।
- संतोष राठौर, डकैतों से चंगुल से छूटा युवक
कहानी पर संशय है
पुलिस को संतोष की कहानी पर भी संशय है। शुक्रवार की दोपहर पुलिस ने जंगल से उसकी बाइक बरामद कर ली। जंगल में रखी बाइक बिल्कुल साफ थी। चार दिन जंगल में खड़ी रहने के बाद भी उस पर धूल नहीं जमी, यह देखकर पुलिस अधिकारी हैरत में हैं। इसके अलावा डकैतों ने संतोष के साथ मारपीट भी नहीं की है।
डकैतों की तलाश जारी है
डकैत, फल कारोबारी को गुरुवार की रात हाईवे पर छोड़ गए थे। अपहरण में जिन डकैतों के नाम सामने आए हैं, उनकी तलाश जारी है।
- निश्चल झारिया, एसडीओपी, घाटीगांव