दवाएं हैं नहीं, मरीजों को देंगे क्या, हालत बद से हुआ बदतर

ग्वालियर। प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में प्रदेश सरकार 18 नवंबर से सरदार बल्लभ भाई पटेल नि:शुल्क दवा वितरण योजना चालू करने जा रही है, जबकि अस्पतालों में दवाओं का स्टॉक समाप्त होने के करीब है। दवाओं की खरीद तमिलनाडु नीति के तहत की जानी है और स्थिति यह है कि जिन कंपनियों को छह माह पहले ऑर्डर दिए गए थे, वे अभी तक इसकी सप्लाई नहीं कर सकी हैं। ऐसी स्थिति में नए ऑर्डर पर भी दवाएं नहीं आ सकेंगी। जब अस्पतालों में दवाएं ही नहीं रहेंगी तो योजना का उद्देश्य कैसे पूरा हो सकेगा? वहीं ग्वालियर में १९ नवंबर को योजना का शुभारंभ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान करेंगे।
सीएमएचओ के पास स्टॉक में 147 तरह की दवाएं हैं, जिनमें कई दवाएं दो माह तक की हैं। इसी तरह सिविल सर्जन के स्टॉक में डेढ़ माह तक की ही दवाएं हैं। यहां चार माह पहले किए गए दवाओं के ऑर्डर में से कुछ ही दवाएं आई हैं। सीएमएचओ ने 131 दवाओं की डिमांड पुन: भेजी है। दतिया जिले में सिर्फ सौ तरह की दवाएं हैं जो डेढ़ से दो माह तक ही बांटी जा सकती हैं।
पिछले माह प्रमुख सचिव के साथ हुई सिविल सर्जन्स की बैठक में दवाओं के अभाव का मुद्दा छाया रहा था। कुछ ने कहा था कि जब तक कंपनियों से दवाएं नहीं आतीं, भोपाल में ही दवाएं खरीदकर उन्हें उपलब्ध कराई जाएं।
इसलिए नहीं हो पाती सप्लाई
तमिलनाडु नीति के तहत 244 तरह की दवाएं खरीदी जा सकती हैं। दवाओं की दरें निर्धारित कर दी गई हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उक्तदवाओं को खरीदने के लिए 65 दवा कंपनियों को ही ऑर्डर कर सकते हैं। इनमें कई दवाएं ऐसी हैं जिन्हें सप्लाई करने का अधिकार एक या दो कंपनियों को ही है। प्रदेश के सभी जिलों से ऑर्डर आने के कारण ये कंपनियां दवाएं समय पर नहीं दे पा रही हैं।
20 करोड़ मांगे
नि:शुल्क दवा वितरण योजना चालू करने के लिए शासन से बीस करोड़ रुपए दवाएं खरीदने के लिए मांगे हैं। 17 से 25 नवंबर के बीच में प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध अस्पतालों में यह योजना चालू कर दी जाएगी। अस्पताल में 161 तरह की इमरजेंसी दवाएं तथा ओपीडी में 31 तरह की दवाएं रहेंगी। दवाओं की कमी है, लेकिन लोकल पर्चेज के जरिये समस्या को दूर करने की कोशिश की जा रही है।
- डॉ. शरद तिवारी, संचालक चिकित्सा शिक्षा








