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संपत्ति कर मामले की जांच में टालमटोल
bhaskar news | Jul 22, 2012, 01:01AM IST
आलम यह है कि परिषद में निर्णय होने के एक सप्ताह बाद भी भाजपा नेताओं और पार्षदों के दबाव के चलते पांच सदस्यीय जांच समिति के नाम तक तय नहीं हो पाए हैं। निगम प्रशासन ने संपत्ति कर वसूली बढ़ाने के लिए दिसंबर-जनवरी में 12 वार्डो की संपत्तियों का भौतिक सत्यापन कराया था। इसके बाद नए आकार-प्रकार के हिसाब से संपत्ति स्वामियों को बिल जारी किए गए।
इसमें निगम कर्मियों द्वारा नापजोख को लेकर संपत्ति स्वामियों द्वारा आपत्तियां लगाई गईं। इस मामले की पड़ताल जब दैनिक भास्कर ने की तो थाटीपुर स्थित एक संपत्ति का मामला सामने आया, जिसमें भौतिक सत्यापन के बाद पहले तो निगम प्रशासन ने संपत्ति स्वामी को 1.05 करोड़ का बिल दिया और उसके एक सप्ताह बाद ही बिल की राशि घटाकर 24 लाख रुपए कर दी गई।
नेता व पार्षद लामबंद
संपत्ति कर वसूली में की गई बड़ी अनियमितताओं के मामले में नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारियों को फंसता देख भाजपा के कुछ जिला पदाधिकारियों सहित निगम में ही ठेकेदारी करने वाले पार्षद उन्हें बचाने के लिए लामबंद हो गए हैं।
उन्होंने संगठन के पदाधिकारियों को भी यह समझाने का प्रयास किया है कि यदि घोटाला खुला तो उससे भाजपा की बदनामी होगी और इसका पूरा श्रेय कांग्रेस को जाएगा। इसके बाद वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भी इस मामले में बैठकें लेकर जांच कराने के इच्छुक पार्षदों समझाने का प्रयास कर रहे हैं। वरिष्ठ नेताओं की इच्छा यह भी है कि समिति में पार्टी के तेज तर्रार पार्षद न आ सकें।
साबित हो सकता है घोटाला
विपक्ष के पार्षदों ने दस्तावेजी प्रमाण रखकर जांच कराने की मांग करते हुए इस मामले को अब तक का सबसे बड़ा घोटाला बताया था। जानकारों का मानना है कि जिस तरह के प्रमाण प्रस्तुत किए गए हैं, उससे विपक्ष के पार्षदों के आरोप सिद्ध हो सकते हैं।
दैनिक भास्कर द्वारा इस मामले में बात करने पर महापौर समीक्षा गुप्ता ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का दावा किया था। दूसरे दिन परिषद ने जांच के आदेश भी कर दिए थे, लेकिन उसके बाद भाजपा के कुछ पार्षद व नेता अफसरों के बचाव में जुट गए। ऐसे में जांच प्रभावित होने की आशंका है।
समिति घोषित की जाएगी
संपत्ति कर मामले की जांच के लिए पार्षदों की पांच सदस्यीय समिति गठित करना है। जल्द ही समिति घोषित कर दी जाएगी।
बृजेंद्र सिंह जादौन, सभापति







