ग्वालियर। गश्त का ताजिया पर पांच लाख रुपए और स्कूटर लूटने के बाद बदमाशों ने स्कूटर को जलालपुर रोड पर छोड़ दिया था। पुलिसकर्मियों ने स्कूटर पर बदमाशों के फिंगर प्रिंट लेने से पहले ही उसे घटनास्थल से उठा लिया। इससे फिंगर प्रिंट नष्ट हो गए। नतीजा- पुलिस की जांच प्रभावित हो गई। उपनगर ग्वालियर के सोड़ा कुआं इलाके में दो घरों में एक साथ चोरी हुई। पुलिस तो मौके पर पहुंच गई लेकिन फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट को छह घंटे बाद बुलाया गया। तब तक चोरों के फिंगर प्रिंट खराब हो चुके थे। इससे चोरों को पकड़ने के लिए एक महत्वपूर्ण सुराग नष्ट हो गया।
प्रदेश में पुलिस का जहां आधुनिकीकरण किया जा रहा है, वहीं ग्वालियर की पुलिस अभी भी पुराने जमाने के हिसाब से काम कर रही है। अपराधियों का सुराग लगाने के लिए नई-नई तकनीकें विकसित होने के बाद भी पुलिस फिंगर प्रिंट लेने जैसी सामान्य कार्रवाई भी नहीं कर रही है। इससे न केवल जांच कमजोर पड़ जाती है बल्कि अपराधियों को बच निकलने का मौका मिल जाता है। कई मामलों में तो घटनास्थल पर फिंगर प्रिंट नष्ट होने के बाद ही फिंगर प्रिंट एक्सपर्ट को बुलाया जाता है।
किसी भी अपराध का सुराग पता करने और अपराधियों की पहचान के लिए फिंगर प्रिंट पुलिस के लिए काफी मददगार होता है। यही कारण है कि किसी संगीन वारदात के बाद पुलिस की फिंगर प्रिंट टीम को तत्काल मौके पर भेजा जाता है। देखा गया है कि जिन अपराधों में अपराधियों के फिंगर प्रिंट लिए गए हैं, उनमें पुलिस को जांच की दिशा तय करने में आसानी होती है। पिछले कुछ सालों में 12 ऐसे केस आए हैं जो फिंगर प्रिंट के जरिए सुलझे और अपराधी को सजा भी हुई है।