इंदौर . आठ किमी के सुपर कॉरिडोर के मुख्य हिस्से में तीन ऐसे क्षेत्र होंगे जहां ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) होगा। इससे आप एक स्थान पर वाहन रखकर बाकी काम पैदल ही घूमकर कर सकेंगे। सुपर कॉरिडोर के लिए बन रहे मास्टर प्लान में यह प्रावधान शहर में बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए इंदौर विकास प्राधिकरण कर रहा है।
कोरियाई कंपनी दोह्वा पूरे प्रोजेक्ट में सर्वाधिक महत्व इसी टीओडी सिस्टम को दे रही है। आईडीए ने जो तीन स्थान चिह्नित किए हैं उसमें भौंरासला, टिगरिया बादशाह और बांगड़दा रोड शामिल हैं। इन क्षेत्रों में ऊंची इमारतें होंगी, जिससे अधिक से अधिक बाजार और गतिविधियां एक ही स्थान पर हो सके। इसे पैडस्ट्रियन जोन का नाम भी दिया गया है। आईडीए की प्लानिंग शाखा के मुताबिक टीओडी बेस्ड मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है, जिससे एक ही जगह आवश्यकता के सभी साधन (बाजार) उपलब्ध हो जाए। अभी ऐसा सिस्टम राजबाड़ा और कोठारी मार्केट में है, लेकिन यहां पार्किग की समस्या है, जबकि कॉरिडोर पर पार्किग के प्रावधान पहले ही तय हो जाएंगे।
वर्टिकल ग्रोथ को तरजीह- सुपर कॉरिडोर के इन हिस्सों में फ्लोर एरिया रेशो (फर्शी अनुपात क्षेत्र या एफएआर) 3 का होगा। कॉरिडोर के सभी प्लॉट डेढ़ हजार वर्ग मीटर से डेढ़ लाख मीटर तक के होंगे। ऐसे में कुल प्लॉट एरिया का तीन गुना निर्माण हो सकेगा। उदाहरण के लिए यदि 10 हजार वर्ग फीट का प्लॉट है तो उस पर सड़क की चौड़ाई पर्याप्त है तो 30 हजार वर्ग फीट तक का निर्माण हो सकेगा। बशर्ते चारों ओर एमओएस (मार्जिनल ओपन स्पेस) छोड़ना होगा।
टीओडी के फायदे
: पार्किग की समस्या नहीं रहेगी।
: एक ही जगह आसानी से सभी आवश्यकताएं पूरी हो सकेंगी।
: जाम की स्थिति नहीं होगी।
: समय और ईंधन दोनों की बचत होगी।
सुपर कॉरिडोर की मुख्य सड़क 75 मीटर बनाने के बाद आईडीए ने 19 करोड़ की आंतरिक सड़कें बनाने की तैयारी शुरू कर दी है। यह सड़कें सुपर कॉरिडोर के दोनों ओर 300-300 मीटर हिस्से को जोड़ेंगी। प्राधिकरण ने इसकी टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। प्राधिकरण के कार्यपालन यंत्री एस.एस. राठौर के मुताबिक हमनें टेंडर बुला लिए हैं। यह सड़कें कॉरिडोर के अलग-अलग हिस्से में बनेगी। सभी सड़कें फोरलेन और सीमेंट कांक्रीट की होगी। इतना ही नहीं रेलवे लाइन के दोनों ओर 30-30 मीटर की सड़क होगी, जिससे वाहन सीधे निकल सकेंगे। डेढ़ साल में सभी सड़कें बनाने की समय-सीमा तय की गई है। टेंडर प्रक्रिया में दो महीने लगेंगे। अभी इन सड़कों के निर्माण से कॉरिडोर के पूरे क्षेत्र को विकसित करने में ज्यादा परेशानी नहीं आएगी।
सुपर कॉरिडोर पर इन्फोसिस के लिए आरक्षित 130 एकड़ में से 115 एकड़ की रजिस्ट्रियां पूरी हो चुकी है। पहले के 100 एकड़ में से बची 9 एकड़ की रजिस्ट्री शनिवार को हुई। इसमें एक जमीन मालिक ने उज्जैन से आकर तो उनके ही परिवार के एक सदस्य ने इंदौर से यह रजिस्ट्री की। अब आईडीए को अतिरिक्त 30 एकड़ में से सिर्फ 15 एकड़ जमीन के अनुबंध और करना है। खास बात यह कि कॉरिडोर पर एक खेड़ापति हनुमान मंदिर के नाम से भी जमीन थी, जिसका अनुबंध भी व्यवस्थापक ने शनिवार को करवा लिया। इसमें से भी 50 प्रतिशत जमीन मंदिर के नाम होगी। भू-अर्जन अधिकारी के मुताबिक अब 130 में से मात्र 15 एकड़ की रजिस्ट्री बाकी है, जो अगले कुछ दिन में हो जाएगी।