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एक फैसला...और सीधे अर्श से फर्श पर आ गया यह करोड़पति बिल्डर

हिमांशु जोशी | May 17, 2012, 02:05AM IST
 
 

इंदौर। सिद्धि विनायक सिटी प्रोजेक्ट के डायरेक्टर जयेश पाटीदार के अर्श से फर्श पर आने की वजह आईडीए की एक प्रस्तावित सड़क थी। इस सड़क के कारण अनुमति निरस्त हो गई और फ्लैट बुकिंग करवाने वाले लोगों का पैसा फंस गया। इसे चुकाने में पाटीदार ने घर-दफ्तर यहां तक कि वाहन भी बैंक के पास गिरवी रख दिए। इस तरह रियल एस्टेट का एक मंजा हुआ कारोबारी 40 करोड़ से ज्यादा का कर्जदार बन गया।

टाउन एंड कंट्री प्लानिंग द्वारा कबीटखेड़ी में करोड़ों की लागत से बनने जा रही मल्टी की अनुमति निरस्त होने से सिद्धि विनायक सिटी प्रोजेक्ट के डायरेक्टर जयेश पाटीदार और उनकी पत्नी लीना को जेल जाना पड़ गया। इतना ही नहीं बुकिंग के दौरान हुए करोड़ों के लेनदेन के चलते इंदौर पुलिस मामला प्रवर्तन निदेशालय को सौंपने जा रही है।

घर-दफ्तर और वाहन तक बैंक के पास गिरवी

4 लाख 51 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के आरोप में गिरफ्तार जयेश अब खुद ही करोड़ों का कर्जदार है। उनका खजराना स्थित पुश्तैनी मकान सवा करोड़ और स्कीम नंबर 78 का बंगला 60 लाख रुपए में बैंक के पास गिरवी रखा है। उन्होंने दफ्तर व गाड़ियों पर भी पैसा उधार ले रखा है।

पुश्तैनी जमीन बेचकर शुरू किया था व्यवसाय

खजराना के एक सरकारी शिक्षाकर्मी मांगीलाल पाटीदार के बेटे जयेश ने 2001 में तीन बीघा पुश्तैनी जमीन बेचकर प्रॉपर्टी के कारोबार में हाथ आजमाया। इन पैसों से उसने स्वास्थ्य नगर कॉलोनी खरीदी, यहां रो-हाउस तथा बंगले बनाकर बेचे और बड़ा मुनाफा हुआ। कामयाबी से उत्साहित होकर जयेश ने कबीटखेड़ी के किसानों से 25 करोड़ रुपए में साढ़े आठ बीघा जमीन खरीद ली और यहां पर एक मल्टी स्टोरी बिल्डिंग बनाने की योजना तैयार की।

निगम की कॉलोनी सेल में जमा करवाए दो करोड़

जयेश ने प्रोजेक्ट से जुड़ी औपचारिकताओं में किसी प्रकार की कमी नहीं छोड़ी थी। उन्होंने जमीन का डायवर्शन और टीएनसी करवाई, साथ ही नगर निगम के कॉलोनी सेल में मल्टी की अनुमति के लिए दो करोड़ रुपए भी जमा करवाए थे। मगर आईडीए की एप्रोच रोड ने उनके प्रोजेक्ट को मिट्टी में मिला दिया।

टीएनसी निरस्त होने से लोगों का उठ गया भरोसा

अनुमति मिलने के डेढ़ साल बाद तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका। आशीष गोयल सहित चार लोगों की शिकायत पर 5 अप्रैल को थाना हीरानगर में जयेश, उनकी पत्नी औैर कंपनी के प्रमोटर अशोक राजपूत के खिलाफ 4 करोड़ 51 लाख रुपए की धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया।
 
 
 

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