लालच पर भरोसे ने पहुंचाया सलाखों के पीछे

रातभर कॉल लगाते रहे- तीनों आयोजक रातभर भंवरकुआं थाने में इस आस में बैठे रहे कि सुबह मनोज सागवान नामक व्यक्ति सुखविंदर की अनुमति के दस्तावेज भेज देगा और वे खुद को निर्दोष साबित कर देंगे। उन्होंने मनोज को कई बार कॉल लगाए लेकिन मोबाइल बंद आया। मनोज के साथी सतीश को भी फोन लगाया लेकिन बात नहीं हो सकी।
ऐसे हुई दोस्ती और बुना लाइव शो का ताना-बाना- स्वप्निल ने खुद को बीबीए का छात्र बताया। वहीं मुकेश सीए और क्लिफर्ड ने कहा वह कंसल्टेंसी का कार्य करता है। स्वप्निल और क्लिफर्ड पुराने दोस्त हैं। वे कई इवेंट में साथ रह चुके हैं। मुकेश मूल रूप से कुरुक्षेत्र (हरियाणा) का है और अगस्त 2012 में ही इंदौर आया है। उसकी और क्लिफर्ड की दोस्ती एक होटल में हुई। इसके बाद तीनों ने बड़ा आयोजन कर लाखों कमाने की योजना बनाई। मुकेश ने बताया सुखविंदर सिंह का दोस्त बताने वाला मनोज सागवान उसके पिता का दोस्त रहा है। उसे मनोज ने भरोसा दिलाया कि वह सुखविंदर का शो सस्ते में इंदौर में करवा देगा।
बिना दस्तावेज बुक कर लिया क्लब : मुकेश ने प्रशासन व अन्य सभी विभागों से अनुमति लेने का जिम्मा लिया था। उसने बताया सुखविंदर सिंह का शो 20 लाख में होगा और एडवांस पांच लाख देना होंगे। सतीश ने कमीशन के २५ हजार रुपए मांगे थे। शुक्रवार को तीनों यह राशि सतीश के खाते में डालने वाले थे। उनके पास सुखविंदर और आयोजन की अनुमति नहीं थी फिर भी पूरे शहर में होर्डिंग टांग दिए और टीवी पर एड देना शुरू कर दिए।
पिता ने कहा- तुम भुगतो : मुकेश ने पिता को आपबीती सुनाई तो वे नाराज हुए और बोले बिना सोचे-समझे तुमने यह सब किया अब भुगतो। स्वप्निल और क्लिफर्ड भी पूरी गड़बड़ी के लिए मुकेश को दोषी ठहरा रहे हैं। उन्होंने माना बिना सोचे-समझे यह कदम उठाया जिससे वे फंस गए।






