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पुलिस अफसर सड़क पर दिखें तभी बढ़ेगा अपराधियों में खौफ
Dainik Bhaskar News
| Jul 31, 2012, 02:38AM IST

हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय बागड़िया द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद अदालत ने फैसला सुनाया। याचिका में यह मुद्दा उठाया था कि शहर में पुलिस बल की कमी के कारण अपराध हो रहे हैं। साथ ही नाइट्रोजापाम व डायजापाम धड़ल्ले बिकने का भी मुद्दा उठा था। याचिका में अतिरिक्त महाधिवक्ता मनोज द्विवेदी ने शासन का पक्ष रखा था।
हाई कोर्ट के आदेश के प्रमुख बिंदु
अदालत ने 20 सितंबर अगली सुनवाई की तारीख तय करते हुए सभी बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है।
- प्रमुख सचिव गृह : बताएं बल की कितनी कमी है, पिछले सालों में कितनी भर्ती की गई, कमी पूरा करने के लिए शासन क्या कर रहा है।
- पीएस होम : बताएं क्राइम इन्वेस्टिगेशन के लिए कितना पुलिस बल काम कर रहा है, क्या यह विंग अलग बनी हुई है और बनी है तो किस तरह से काम कर रही है।
- कलेक्टर : शहर में नाइट्रावेट कैसे बिक रही है। इसकी बिक्री पर निगरानी और नियंत्रण करें।
- एसएसपी : एसएसपी, एसपी, एसपी,सीएसपी- निर्देशित किया जाता है केवल केबिन में बैठे न रहें, फील्ड में जाएं, सघन इलाकों में जरूरत पड़ने पर ट्रैफिक पॉइंट पर खड़े रहें ताकि लोगों में सुरक्षा की भावना व असामाजिक तत्वों में भय पैदा हो। अगली तारीख पर बताएं कौन कहां कहां फील्ड में रहा।
- थाना प्रभारी : थानों के प्रभारी अपने इलाके में आकस्मिक चेकिंग करें। आदतन अपराधियों पर निगरानी रखें व अवैधानिक हथियार हों तो जब्त करें। इसकी रिपोर्ट पेश करें।
- प्रमुख सचिव : कांस्टेबल, हेड कांस्टेबल व एएसआई के तबादले सालों तक जिले में एक से दूसरे स्थान पर क्यों नहीं होते। लंबे समय तक एक ही जगह रहने से अपराधियों से इनके प्रगाढ़ संबंध बन जाते हैं। अगली सुनवाई में रिपोर्ट पेश करें।








