इस तीर्थस्थल पर गए, तो भूलकर भी मत लगाना डुबकी

कोटेश्वर।देश की सबसे प्राचीनतम नदियों में से एक नर्मदा तेजी से प्रदूषित हो रही है। निर्मल नीर सड़ांध मारते पानी में तब्दील होने लगा है। उस पार राजघाट (बड़वानी) और इस पार चिखल्दा से आगे की ओर किनारे पर श्रद्धालु अब ‘आचमन’ से भी परहेज कर रहे हैं। पानी बड़ों के पेट में दर्द पैदा कर रहा है वहीं बच्चों में दस्त की शिकायत बढ़ रही है।
दर्शन से पहले दल-दल में होता है स्नान
नर्मदा का प्राचीन और समृद्ध किनारा कोटेश्वर तीर्थ में अधिकांश श्रद्धालु अब घर से स्नान करके आने लगे हैं। यहां नर्मदा दर्शन के बाद वे प्राचीन मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं। श्रीराम मंदिर के पुजारी जयदेव त्रिवेदी कहते हैं घाट के तीन हिस्से डूब चुके हैं और जो लोग नहाने जाते हैं वे घुटनों तक कीचड़ में धंस जाते हैं। अब तो यहां बारह महीनों पानी गंदा ही रहता है। इस पानी के सेवन से मैं बीमार रहने लगा हूं। सुनील सोनी ने कहा साफ पानी की आस में बोरिंग भी करवाए पर नीचे रेत ही रेत होने के कारण सक्सेस नहीं हुए।
तमाम तरह की तकलीफों से छुटकारा पाने के लिए आस्था के साथ डुबकी लगाने वाले लोगों को अब पानी ‘काटने’ लगा है। थोड़ी देर पानी में रहने के बाद ही खुजली उन्हें परेशान करती है। सरदार सरोवर बांध में पानी भरने (बैक वॉटर) से नर्मदा बड़े जलाशय में तब्दील हो रही है। पानी का बहाव किनारे पर खत्म होने से पानी प्रदूषित होने लगा है।
राजघाट से नीचे की ओर से शुरू हुई बीमारी तेजी से ऊपर आ रहे है। कई स्थानों पर तो पानी सड़ांध मारने लगा है। एक हिस्से में किनारे पर बसे लोग बारह महीने पानी में फिटकरी घोलने को मजबूर हैं। कई घरों में वॉटर प्यूरी फाई लग चुके हैं और यह सिलसिला बदस्तूर जारी है। चिखल्दा, कोटेश्वर, निरसपुर, कोठड़ा, भवती, धरमराय, बिजासन जैसे कई गांव हैं जहां के बाशिंदे ठहरा हुआ प्रदूषित पानी पीने को मजबूर हैं।
बोरिंग करवाए पर पानी खारा निकला
कोठड़ा गांव की आबादी करीब 4 हजार है। एक वक्त था जब यहां के बाशिंदे नर्मदा के दर्शन और आस्था की डुबकी से अपनी छोटी-मोटी बीमारी को दूर करने का दम भरते थे मगर प्रदूषण के कारण हालत पूरी तरह बदल गए हैं। भरत पिता पन्नालाल कहते हैं परसों मैं नदी किनारे ही था। प्यास लगी तो अंजुरी में नदी का पानी लेकर जैसे ही मुंह में लिया उबकाई आ गई। अजीब सा स्वाद और बदबू आ रही थी। बाद में घर आकर पानी पीया ऐसी स्थिति है नर्मदा की। मधु कंकोरे ने कहा लोगों में पेट दर्द, खुजली की परेशानी अब आम लगती है। खुद की चमड़ी बताते हुए बोले ये सब नर्मदा का बहाव थमने से सड़ रहे पानी के कारण हो रहा है।
नाविक महिला बोलीं डॉक्टर जिंदाबाद!
नर्मदा में नाव चलाने वाले पति लक्ष्मण का हर वक्त साथ देने वाली सावित्रीबाई नर्मदा में तेजी से फैल रहे प्रदूषण से बेहद दु:खी है। उन्होंने कहा बांध में पानी भरने से पहले किनारे पर पानी कांच की तरह बहता था। आज कीचड़, काई और कचरे ने मैया की सूरत ही बिगाड़ दी। पानी रुकने के बाद हर महीने किसी ने किसी बीमारी के चलते डॉक्टर पास जाना पड़ता है। डॉक्टर जिंदाबाद है.! यह सुन लक्ष्मण ने कहा पानी पीने का मन नहीं होता पर डर लगता है कि माई बुरा मान जाएगी तो अच्छा नहीं होगा और यही पानी पी लेते हैं..।
50 से ज्यादा गांवों के हाल बुरे
बांध में पानी भरने के बाद किनारे पर धार, बड़वानी और आलीराजपुर जिले के करीब 50 गांव के लोग प्रदषित पानी पीने को मजबूर हैं। बीमारियां बढ़ रही हैं। हमारी स्टडी है कि बच्चे और महिलाएं ज्यादा बीमार हो रहे हैं। गंगा और यमुना के बाद नर्मदा भी प्रदूषण का शिकार हो गई है। यह बीमारी तेजी से ऊपर (अमरकंटक) की ओर बढ़ रही है। - मेधा पाटकर, नर्मदा बचाओ आंदोलन
जिम्मेदार दे रहे रटा-रटाया जवाब
रिपोर्ट तलब कर दौरा करूंगा -अफरोज अहमद
नर्मदा कंट्रोल अथॉरिटी के परियोजना निदेशक (पुनर्वास) से सीधी बात - नर्मदा किनारे का पानी बुरी तरह प्रदूषित हो रहा है, खबर है आपको? जवाब : मैं अफसरों से रिपोर्ट बुला रहा हूं। खुद भी दौरा करूंगा।
- पिछली बार किनारे के मूल गांवों का दौरा कब किया था? नबआं का कहना है आप 10 साल से नहीं गए? जवाब : ऐसा नहीं है, समय-समय पर आना-जाना होता है।
- क्या लोग गंदा और प्रदूषित पानी ही पीते रहेंगे? जवाब : सरकार की जिम्मेदारी है शासन को स्थिति से अवगत करवाऊंगा।








