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ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट बिगाड़ने की धमकी

Dainik Bhaskar News | Jul 31, 2012, 02:23AM IST
 
 

इंदौर। छापे की कार्रवाई के बाद वाणिज्यिक कर विभाग व मल्टीप्लेक्स मालिकों में ठन गई। मल्टीप्लेक्स मालिकों व प्रबंधन ने सिने सर्किट एसोसिएशन के साथ सोमवार को बैठक की। मालिकों व प्रबंधकों ने यहां तक कह दिया कि जरूरत पड़ी तो ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट के पहले राज्य शासन की वादाखिलाफी का विज्ञापन दे देंगे, तभी सरकार को समझ पड़ेगी। सभी ने तय किया कि वे विभाग की कार्रवाई को लेकर कानूनी लड़ाई लड़ेंगे और मुख्यमंत्री से भी मिलेंगे।

उधर, विभाग ने अपनी कार्रवाई को सही बताते कहा कि भोपाल के दोनों मल्टीप्लेक्स सिनेपोलिस व फन सिनेमा दर्शकों से मनोरंजन कर नहीं ले रहे। विभाग ने कहा कि छूट का मतलब था कि न दर्शकों से टैक्स लें और न शासन को दे, लेकिन मल्टीप्लेक्स ने दर्शकों से टैक्स वसूला और अपनी जेब में रख लिया। यह अवैधानिक है।

तब सरकार को समझ आएगी- इससे पहले सिने सर्किट एसोसिएशन के सचिव जितेंद्र जैन और वेलोसिटी, आइनॉक्स, मंगल एडलैब्स, पीवीआर व अन्य मल्टीप्लेक्स के प्रबंधकों की बैठक हुई। मल्टीप्लेक्स मालिकों ने कहा कि जरूरत हुई तो रिलायंस, आइनॉक्स जैसे मल्टीप्लेक्स ग्लोबल इन्वेस्टर्स मीट के पहले विज्ञापन देकर निवेशकों से कहेंगे कि यहां निवेश नहीं करें। ऐसा करने पर ही सरकार को समझ आएगी।

यह था गजट नोटिफिकेशन

वर्ष 2000 में कई विभागों के अधिकारियों ने मिलकर मल्टीप्लेक्स नीति बनाई थी। इस आधार पर सरकार ने 2001 में गजट नोटिफिकेशन जारी किया। इसमें है कि मल्टीप्लेक्स में निवेश की सीमा तक मालिकों को मनोरंजन कर में छूट रहेगी। इसमें पहले तीन साल सौ, चौथे साल 75 और पांचवें साल ५क् फीसदी छूट मिलेगी। शर्त होगी कि वे अगले पांच साल तक भी मल्टीप्लेक्स खुला रखेंगे। ऐसा नहीं करने पर मनोरंजन कर में मिली छूट 15 फीसदी ब्याज के साथ शासन को जमा कराना होगी।

टिकट की अधिकतम सीमा तय नहीं

मल्टीप्लेक्स की नीति में टिकट की अधिकतम दर तय नहीं की गई है। केवल न्यूनतम दर के लिए कहा गया कि ऐसा मल्टीप्लेक्स जो एसी नहीं लगाता और टिकट दर 50 रु. रखता है, उसे मनोरंजन कर से छूट रहेगी। टिकट की अधिकतम सीमा तय नहीं होने से दर्शकों को देर रात के अलावा शुक्रवार, शनिवार, रविवार के शो में 150 रु. तक देने पड़ते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों पर की कार्रवाई- वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारियों ने बताया कि पंजाब सरकार के एक केस में और हाल ही में महाराष्ट्र सरकार की टैक्स छूट को लेकर दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निर्णय दिए हैं। इसमें कहा गया है कि कर में छूट का पैसा टैक्स वसूलने वाला अपने पास नहीं रख सकता। यह शासन जनकल्याणकारी कामों में लगाए।

हम कार्रवाई जारी रखेंगे

छूट का मतलब था कि मल्टीप्लेक्स वालों को दर्शकों से भी पैसा नहीं लेना। कार्रवाई सही थी और हम टैक्स वसूली की कार्रवाई जारी रखेंगे।
- अमित राठौर, आयुक्त वाणिज्यकर कर विभाग

कानूनी लड़ाई लड़ेंगे

बैठक में तय किया है कि टैक्स को लेकर विभाग द्वारा नोटिस देने व अन्य कार्रवाई करने पर मल्टीप्लेक्स मालिक कानूनी सलाह लेकर कार्रवाई करेंगे। मुख्यमंत्री को भी जानकारी देंगे।
- जितेंद्र जैन, सचिव सिने सर्किट एसोसिएशन, इंदौर
 
 
 

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