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जागो ग्राहक जागो! एक ऐसा सच, जो आपकी आंखें खोल देगा

Dainik Bhaskar News | Apr 04, 2012, 07:27AM IST
जागो ग्राहक जागो! एक ऐसा सच, जो आपकी आंखें खोल देगा

इंदौर। आप दुकानदार से 250 ग्राम चायपत्ती मांगते हैं लेकिन पैकिंग में मिलती है 225 ग्राम। 100 ग्राम बिस्किट की कीमत चुकाते हैं लेकिन हाथ में आता है 86.4 ग्राम का पैकेट। इस छोटी सी हेर-फेर से देश में लाखों ग्राहक रोज धोखा खा जाते हैं और संबंधित निर्माता कंपनी के खाते में करोड़ों-अरबों का इजाफा होता है लेकिन 1 जुलाई से ऐसा नहीं होगा। कंपनियां स्टैंडर्ड वजन यानी 100 ग्राम, 200 ग्राम और एक किलो जैसी पैकिंग में ही उत्पाद बाजार में उतार सकेंगी।
 
बाट एवं माप (डिब्बा बंद वस्तुएं) अधिनियम में यह बदलाव पहले ही कर दिया गया था लेकिन इसे लागू किया जाएगा 1 जुलाई 2012 से। इससे पहले अप्रैल से जुलाई तक ग्राहक और दुकानदारों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाया जाएगा। 1 जुलाई के बाद नॉन स्टैंडर्ड मात्रा वाली वस्तुओं की पैकेजिंग नहीं होगी। ऑल इंडिया लीगल मेट्रोलॉजी ऑफिसर्स एसोसिएशन के संयुक्त सचिव हरीश पी. प्रजापति कहते हैं कि कई बार यह देखने में आया कि नॉन स्टैंडर्ड की आड़ में उत्पादक ग्राहकों को उसी कीमत पर कम सामान दे देते थे लेकिन हम कार्रवाई नहीं कर पाते थे। दो साल तक नियम बदलने के लिए अभियान चलाया और अब नियम में फेरबदल किया गया है।
 
इसलिए दिया है समय
 
सरकार ने जुलाई तक का समय इसलिए दिया है कि बाजार में उपलब्ध सामग्रियों की खपत हो जाए। वहीं उत्पादक भी तैयारी कर लें। 1 जुलाई के बाद उत्पादित पैकेज्ड सामान में नॉन स्टैंडर्ड मात्रा दिखी तो कार्रवाई होगी।
- नसीमुद्दीन खान, अध्यक्ष, म.प्र. लीगल मेट्रोलॉजी ऑफिसर्स एसोसिएशन
 
पहले यही नियम था
 
केंद्र सरकार के बाट और माप मानक (डिब्बा बंद हेतु) नियम 1977 के मुताबिक बाजार में मिलने वाली हर पैकेटबंद वस्तु की मात्रा और कीमत स्टैंडर्ड होना चाहिए। ऐसा इसलिए ताकि ग्राहक आसानी से यह तुलना कर सके कि एक ही मात्रा का सामान कौन-सी कंपनी कितनी कीमत में बेच रही है। मल्टीनेशनल कंपनियों के लिए शिथिलता - मल्टीनेशनल कंपनियों का माल भारतीय बाजार में खुले तौर पर आने लगा तो विदेशों से आने वाली चॉकलेट, वेफर्स सहित अन्य खाद्य सामग्री अलग-अलग मात्रा (जैसे 18 ग्राम, 64 ग्राम आदि) में आने लगी। इसके लिए 2005 में सरकार ने नियम शिथिल कर दिए।
 
सितंबर में किया संशोधन -1 अप्रैल 2011 में इसमें कई संशोधन किए हैं लेकिन नॉन स्टैंडर्ड मात्रा में बदलाव नहीं किया गया। सितंबर 2011 में नियमों में फिर संशोधन कर नॉन स्टैंडर्ड माप को प्रतिबंधित कर दिया।
 
सवाल : मल्टीनेशनल कंपनियां प्रोडक्ट बाजार में कैसे बेचेंगी?
 
जवाब : यह आयात करने वाले को ध्यान में रखना पड़ेगा कि मल्टीनेशनल कंपनियों की ओर से आने वाले सामान की पैकेजिंग स्टैंडर्ड मात्रा में ही हो।
 
ऐसे करते हैं गड़बड़ी कि उपभोक्ता पकड़ नहीं पाता
 
- नॉन स्टैंडर्ड पैकिंग में मैन्यूफैक्चर्स कीमत तो स्थिर रखते हैं लेकिन सामग्रियों की मात्रा घटा देते हैं। नॉन स्टैंडर्ड मात्रा याद रखना आसान नहीं इसलिए उपभोक्ता ठगी को पकड़ ही नहीं पाता था।
 
- यदि गड़बड़ी पकड़ में आ भी गई तो नियमों में शिथिलता के कारण नापतौल विभाग कार्रवाई नहीं करता।
 
यह जरूर देखें
 
- एमआरपी (मैक्सिमम रीटेल प्राइज)
- मैन्यूफैक्चरिंग डेट
- मैन्यूफैक्चरिंग एड्रेस
- कंज्यूमर केयर नंबर:एक्सपायरी डेट।
 
यहां करें शिकायत
 
प्रादेशिक कार्यालय:
कंट्रोलर, नापतौल विभाग (मप्र सरकार), डाक भवन के पास, होशंगाबाद रोड, भोपाल, 0755-2551017
 
स्थानीय कार्यालय
डिप्टी कंट्रोलर, नापतौल विभाग 127, जेलरोड, चिकमंगलूर चौराहा के पास, इंदौर, फोन : 0731-2544424

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