मुझे और रानी को ट्रस्ट से बाहर करना चाहते हैं इंदौरी नेता : मल्होत्रा

इंदौर। मेरी उम्र 80 साल है और 79 रानी (उषा राजे) की। हम लोग कब चले जाएं, कह नहीं सकते। इसलिए लोग हमें परेशान कर रहे हैं कि हम लोगों को खासगी ट्रस्ट से बाहर कर दिया जाए और इसकी करोड़ों की संपत्ति पर कब्जा कर लिया जाए। इन सबके पीछे इंदौर के नेता और उनकी राजनीति है। यह कहना है खासगी ट्रस्ट के ट्रस्टी सतीशचंद्र मल्होत्रा का। उन्होंने कहा कि हम इस तरह साजिश का शिकार होकर ट्रस्ट से बाहर नहीं फेंके जा सकते। हम अपनी लड़ाई हाईकोर्ट व सुप्रीमकोर्ट तक लड़ेंगे।
संपत्ति देखकर नेताओं के मुंह में पानी आ रहा है, हम सुप्रीम कोर्ट तक लड़ेंगे
भास्कर: आरोप लग रहे हैं कि आप पॉवर ऑफ एटार्नी से ट्रस्ट की संपत्ति बेच रहे हैं
मल्होत्रा: सरकार ट्रस्ट के प्रबंधन के लिए 2.91 लाख रु. सालाना देती रही। हमने छह बार इसे बढ़ाने के लिए कहा। मना कर दिया। हमने पूछा- संपत्ति बेच दें? उन्होंने जवाब दिया जो आपको ठीक लगे। अब 60 साल बाद कह रहे हैं कि आपने गलत किया। हमने अपने 8-10 करोड़ रु. ट्रस्ट में मिलाए हैं।
अचानक यह मुद्दा क्यों उठा?
: मैं भी यही कह रहा हूं कि आज यह मुद्दा क्यों उठा? ट्रस्ट में मैं और रानी हैं। शासन की ओर से तीन प्रतिनिधि हैं। जो भी निर्णय हुए, सभी के हस्ताक्षर से हुए। अब सरकार कैसे कह सकती है कि उसे कोई जानकारी नहीं थी।
आपने बेटे को भी ट्रस्टी बनाया?
: हमारे बाद संपत्ति संभालने वाला कोई नहीं है, इसलिए पुत्र को ट्रस्टी बनाया।
आपको इस विवाद की क्या वजह लगती है?
: संपत्ति बेचकर पैसे ट्रस्ट के खाते में जमा हुए। आज ट्रस्ट की जो संपत्ति है, उसे देखकर उन लोगों के मुंह में पानी आ रहा है, जो इस पर कब्जा करना चाहते हैं। सब चाहते हैं कि दोनों बुजुर्ग हैं, इन्हें परेशान कर ट्रस्ट से बाहर फैंक दो, इनकी जगह दो अन्य सदस्य बनेंगे वे
नेता होंगे और ट्रस्ट की संपत्ति पर कब्जा हो जाएगा।
सरकार में कौन हैं जो आपके पीछे पड़े हैं?
: अधिकारी तो आते-जाते रहते हैं। लेकिन जिस तरह यह मुद्दा उठा है, उसमें राजनीति ही नजर आ रही है। शहर के नेता, राजनीति कर रहे हैं और मकसद ट्रस्ट की करोड़ों की संपत्ति है। सीधे तौर पर किसी का नाम नहीं ले सकता।
आपको ट्रस्ट से क्या मिलता है?
: ट्रस्ट में हमने उलटे 10 करोड़ रु. लगाए हैं। मेरी सालाना आय 100 करोड़ है और फिर भी आपको लगता है कि ट्रस्ट से मुझे पैसे चाहिए? रानी और मैने एक इंच जमीन भी अपने पास नहीं रखी है। सब कुछ ट्रस्ट व सामाजिक संस्थानों को दे दिया।
क्या वाकई ट्रस्ट की संपत्ति सरकार की है?
: नहीं। जब मध्यभारत बना तो हमने मिलकर ट्रस्ट बनाया। संपत्ति न मेरी, न रानी की और न सरकार की है। सिर्फ ट्रस्ट की है।
सरकार कह रही है सचिव और संपत्ति बेचने वालों पर आपराधिक कार्रवाई करेंगे। आप क्या कहते हैं?
: ट्रस्ट की बैठक में मुझे पॉवर ऑफ एटार्नी दी गई, जो मैंने सचिव को दी। संपत्ति की बिक्री वैध तरीके से हुई। हमने कोई गलती नहीं की। हम सब कोर्ट में देख लेंगे।
आरोप है कि आपने हरिद्वार, पुष्कर घाट जैसी संपत्ति कौडिय़ों के भाव बेच दी?
: मैं पागल नहीं हूं।... और न ही संपत्ति मेरे खाते में आ रही है। दो सौ साल पुरानी संपत्ति है, कई जगह अतिक्रमण है। अब इन्हें रखकर क्या करेंगे? वैसे भी अतिक्रमण वाली संपत्ति के दाम काफी कम हो जाते हैं।
आप कोर्ट जा रहे हैं?
: बिल्कुल । जल्द ही हाईकोर्ट में याचिका लगा रहे हंैं। जरूरत हुई तो सुप्रीम कोर्ट भी जाएंगे। वहां कह दिया जाए कि संपत्ति सरकार की है तो हम चुपचाप हट जाएंगे। लेकिन न्याय के लिए अंतिम सांस तक लड़ेंगे।
खासगी ट्रस्ट की एक नजर
- देश भर में सात राज्यों के 28 शहरों में ट्रस्ट की संपत्ति है
- 250 से अधिक मंदिर, 12 हजार एकड़ में फैली संपत्ति है
- जिले में 37 मंदिर इस ट्रस्ट के अधीन है






