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तकनीकी चूक से आसान हो सकती है वापसी

Dainik Bhaskar News | Aug 05, 2012, 03:03AM IST
 
 


इंदौर। सिंधिया गुट के बीस सदस्यों की सदस्यता रद्द करने के मामले में फर्म्स एंड सोसायटी से तकनीकी चूक होने की बात कही जा रही है। शिकायतकर्ता की शिकायत पर सोसायटी असिस्टेंट रजिस्ट्रार ने एमपीसीए को तो नोटिस दिए और जवाब-तलब किया, लेकिन प्रभावित बीस सदस्यों को सुनवाई का कोई मौका नहीं दिया। खासतौर से वे चार सदस्य जिनका शिकायत में नाम भी नहीं था, उन्हें बिना कुछ सुने ही बाहर कर दिया गया। सोसायटी छह माह तक केवल एमपीसीए (जिसने बीस लोगों को सदस्य बनाया था) से ही पत्राचार करती रही। कानून के जानकारों के अनुसार यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत का उल्लंघन है। प्रभावित सदस्य एक-दो दिन में हाई कोर्ट जा सकते हैं।

एमपीसीए को जाना होगा रजिस्ट्रार के पास- सोसायटी एक्ट में बिंदु 40 के तहत अपील का प्रावधान है। इसमें साफ है कि यदि रजिस्ट्रार से निचले स्तर से कोई फैसला आया है तो अपील रजिस्ट्रार स्तर पर करना होगी और यदि फैसला रजिस्ट्रार स्तर से आया है तो प्रभावित पक्ष शासन (पीएस उद्योग विभाग) के पास अपील कर सकता है। यह अपील आदेश दिनांक से दो माह के भीतर करना जरूरी है।

सदस्यता के लिए भी स्पष्ट है प्रावधान

सोसायटी एक्ट के बिंदु 3 में साफ है कि जो व्यक्ति पंजीकृत संस्था की सदस्यता का शुल्क भरता है, सदस्यता रजिस्ट्रर में हस्ताक्षर करता है और सदस्यता से इस्तीफा नहीं देता है, वह सदस्य रहेगा। नियम 16 में भी साफ है कि सदस्यता बनाए गए सदस्य को 30 दिन के भीतर सदस्यता रजिस्ट्रर पर हस्ताक्षर करना जरूरी है। संस्था को भी यह रजिस्ट्रर रखना अनिवार्य किया गया है। इस हिसाब से देखें तो सभी बीस सदस्यों ने शुल्क भरा है और हस्ताक्षर भी किए हुए हैं।

प्राकृतिक न्याय के विपरीत है मामला

न्याय प्रक्रिया में हमेशा प्राकृतिक न्याय का नियम चलता है। इसमें आप जिसके खिलाफ कुछ करने जा रहे हो उसे अपना पक्ष रखने का अधिकार होता है। इस मामले में सोसायटी ने कभी भी बीस सदस्यों से बात नहीं की। इसलिए यह सदस्य हाई कोर्ट जा सकते हैं। -अरविंद बागड़िया, वकील

जो सही होगा सामने आ जाएगा

बीस सदस्यों को अधिकारियों ने सुनवाई का मौका नहीं देकर प्राकृतिक न्याय का उल्लंघन किया? - सदस्यों को भी सुना जाना चाहिए, लेकिन यही सारी बातें हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान सामने आएंगी और उसका विश्लेषण होगा। जो सही होगा कोर्ट में सामने आ जाएगा।

फर्म्स एंड सोसायटी पर दोहरा रवैया अपनाने के आरोप लग रहे हैं? -आरोप-प्रत्यारोप राजनीति का काम है, हम अधिकारी वर्ग हैं नियमों से काम करते हैं।

आपके पास एमपीसीए से अपील आई है? - अभी कोई अपील नहीं आई।

आगे इस मामले में सोसायटी क्या कदम उठाएगी? - मैंने सुना है कि एमपीसीए हाई कोर्ट गया है, मामला न्यायिक हो गया है, इसलिए कुछ नहीं कहूंगा। (रजिस्ट्रार शरद तिवारी ने आरोपों को नकारा)

 
 
 

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