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एनआरआई को इन नए प्रावधानों को समझना होगा

Dainik Bhaskar News | Apr 28, 2012, 02:36AM IST
 
 

इंदौर। विदेशी मुद्रा आकर्षित करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा 1991 से उठाए गए कदमों के फलस्वरूप भारतीय पूंजी बाजार में काफी उदारीकरण हुआ है। किसी भी व्यक्ति का विदेश जाना व लौटना आम बात हो गई है। इसलिए एनआरआई पर लगने वाले आयकर और फेमा के प्रावधानों की जानकारी होना महत्वपूर्ण हो गया है।

यह कहना है सीए आलोक जैन का। टैक्स प्रैक्टिशनर्स एसोसिएशन और सीए शाखा द्वारा शुक्रवार को एनआरआई के लिए आयकर और फेमा के प्रावधानों पर आयोजित सेमिनार में श्री जैन मुख्य वक्ता थे। उन्होंने बताया व्यक्ति का एनआरआई होना इस बात पर निर्भर करता है कि वह वर्ष में 182 दिन या उससे ज्यादा दिन भारत में रहा है। हालांकि कुछ परिस्थितियों में गणना भारत में 60 दिन निवास के आधार पर ही की जाती है। एनआरआई करदाता के संबंध में आयकर विभाग कुछ परिस्थितियों में यह मान लेता है कि इस आय का स्त्रोत भारत में स्थित है, जिस पर एनआरआई का कर दायित्व भारत में आता है।

कुछ व्यापार पर है रोक

उन्होंने बताया कि देश में एनआरआई करदाता के लिए कुछ व्यापार पर रोक है जैसे जमीन की खरीदी-बिक्री, कृषि भूमि और प्रिंट मीडिया व्यवसाय। किसी भी एनआरआई को देश में भुगतान करने के पहले भुगतानकर्ता को यह सुनिश्चित करना होगा कि उस सौदे से संबंधित आयकर कटौती सरकार को भुगतान की गई है। यह प्रावधान किसी भी एनआरआई से जमीन खरीदने पर भी लागू होते हैं।

हाल ही में केंद्र सरकार द्वार वोडाफोन कंपनी के स्रोत पर कटौती के लिए जो मामला दर्ज किया था उसे सुप्रीम कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि इस सौदे से कोई आय भारत में अर्जित नहीं हुई। इसलिए वोडाफोन पर कटौती का कोई दायित्व नहीं आता। हालांकि केंद्र सरकार द्वारा इस संबंध में पूर्व प्रभावी समय से संशोधन किया गया है। इसका वैश्विक बाजार में काफी विरोध हो रहा है। कार्यक्रम में एस.एन. गोयल, अनिल खंडेलवाल, नरेंद्र भंडारी आदि मौजूद थे।
 
 
 

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