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खिलाड़ियों के भविष्य के साथ खिलवाड़

उदय प्रताप सिंह | Jun 18, 2012, 02:25AM IST
 
 

इंदौर। जिला शिक्षा विभाग की लापरवाही का खामियाजा इंदौर जिले के करीब 40 बच्चों को भुगतना पड़ा है। करीब सात महीने पहले इंदौर में आयोजित की गई 57वीं राज्यस्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता में मेडल जीतने वाले इन स्टूडेंट्स को आज तक विजेता का सर्टिफिकेट नहीं दिया गया है। विभाग के अधिकारियों की सुस्ती के कारण ये बच्चे खेल एवं युवा कल्याण विभाग की ओर से दी जाने वाली स्पोर्ट्स स्कॉलरशिप के लिए आवेदन ही नहीं कर सके। बच्चे अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटते रहे और आवेदन की तारीख निकल गई। डीबी स्टार ने इसकी छानबीन की तो अधिकारी पल्ला झाड़ते हुए अपनी जिम्मेदारी दूसरों पर थोपने लगे।

30 अक्टूबर से 3 नवंबर 2011 के बीच इंदौर में 57वीं राज्यस्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता आयोजित की गई थी। इसके तहत कराटे, वॉलीबॉल, रोलबॉल, वेट लिफ्टिंग और राइफल शूटिंग के मुकाबले हुए थे। इसमें प्रदेशभर के करीब 2500 खिलाड़ियों ने भाग लिया था। इन मुकाबलों में पहला, दूसरा और तीसरा स्थान पाने वाले स्टूडेंट्स को खेल विभाग की तरफ से स्कॉलरशिप दी जाती है। स्कॉलरशिप के लिए स्टूडेंट्स को निर्धारित तारीख तक आवेदन करना पड़ता है। इस साल इसकी आखिरी तारीख 31 मई थी।

विजेताओं को मिलती सालाना स्कॉलरशिप

प्रथम स्थान : 7200 रुपए
दूसरा स्थान : 6000 रुपए
तीसरा स्थान : 4800 रुपए

प्रतियोगिता के सात महीने बाद भी विजेताओं को सही सर्टिफिकेट नहीं दिए जा सके। कुछ बच्चों को विभाग ने सही सर्टिफिकेट दे दिए, लेकिन करीब 40-50 बच्चों को मेडल जीतने के बावजूद महज पार्टिसिपेशन सर्टिफिकेट थमा दिए गए। बच्चे विभाग के चक्कर काटते रहे और किसी भी अधिकारी ने उनकी फरियाद नहीं सुनी। आवेदन की तारीख गुजर गई और बच्चे स्कॉलरशिप से वंचित रह गए।
 
 
 

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