बराती बना वहशी, तीन साल की बच्ची के साथ रेप के बाद हत्या

इंदौर। एमआईजी थाना क्षेत्र में तीन साल की बच्ची से ज्यादती के बाद हत्या कर दी गई। सोमवार सुबह उसकी लाश नाले में मिली। उसका सिर पत्थर से फूटा हुआ था। वह रविवार देर शाम से लापता थी।
सुबह सोमनाथ की जूनी चाल निवासी शिवानी (3) पिता अर्जुन फणसे की लाश मालवीयनगर के नाले में मिली। शिवानी के पैर पानी में डूबे थे जबकि बाकी हिस्सा जमीन पर था। सिर पर पत्थर की चोट के निशान थे। शव के पास खून सनी ईंट और फर्शी का टुकड़ा पड़ा मिला। आशंका है कि उसकी पत्थर से सिर फोड़कर हत्या की गई है। शार्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि बच्ची के साथ ज्यादती की गई है। इसके बाद हत्या कर लाश नाले में फेंकी गई है। घटना का पता चलते ही परिजन बिलख पड़े। मां मंगला बदहवास हो गई।
बराती बनकर आया था वहशी!
परिजन ने बताया कॉलोनी में रविवार रात करीब आठ बजे एक बरात आई थी। बरात घर के सामने से निकल रही थी। शिवानी उसे देखने के लिए बाहर खड़ी हो गई। उसके आधे घंटे बाद से वह लापता हो गई। काफी तलाशने के बाद भी वह नहीं मिली तो एमआईजी थाने में गुमशुदगी दर्ज कराई। आशंका है कि आरोपी बरात के दौरान शिवानी को उठा ले गया था। पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है।
‘हत्यारे अपने बीच में से हैं’
परिजन और रहवासियों ने शाम को एमआईजी थाने के सामने सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन किया। उनकी मांग थी आरोपी को पकड़कर कड़ी से कड़ी सजा दी जाए। उन्होंने पुलिस प्रशासन के विरोध में नारेबाजी की। मौके पर पहुंचे सीएसपी ने कहा कि हत्यारा अपने ही बीच में से है। वह जल्दी पकड़ा जाएगा। उन्होंने 12 घंटे में आरोपी को पकड़ने का आश्वासन दिया। परिजन ने हत्यारे का जुलूस निकालने की मांग की। इस पर सीएसपी ने जुलूस निकालने के लिए आश्वस्त भी किया।
डेढ़ घंटे तक नहीं आई डॉक्टर
सुबह मिले शव के पोस्टमार्टम के लिए परिजन एमवाय अस्पताल में शाम तक परेशान होते रहे। पीएम टीम में महिला डॉक्टर की जरूरत थी लेकिन कोई भी डॉक्टर पीएम के लिए आने को तैयार नहीं थी। एक-डेढ़ घंटे तक परिजन डॉक्टर का इंतजार करते रहे। जब कोई महिला डॉक्टर नहीं आई तो अस्पताल प्रशासन ने डॉ. रचना पाटीदार को फोन किया। उसके बाद वे आईं और फिर पीएम हुआ। इस तरह अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के चलते शाम को पीएम हो पाया।
एक माह पहले पिता शहर आए थे इलाज कराने
शिवानी के परिवार में माता-पिता व चार बड़ी बहनें हैं। पिता अर्जुन मूल रूप से मंदसौर जिले के ननासा गांव के रहने वाले हैं। अर्जुन टीबी की बीमारी का इलाज कराने एक माह पहले ही इंदौर आए थे। वे यहां मजदूरी करते हैं।










