इंदौर। वक्त- दोपहर 12.35 बजे
जगह- पीपल्याकुमार गांव में लड़कियों का आवासीय छात्रावास।
होस्टल के क्लास रूम में अलग-अलग कक्षाओं की बच्चियां कतारबद्ध बैठी थीं। कुछ लड़कियां सुबह 9 बजे से खड़ी थीं। होस्टल प्रभारी शगुफ्ता शेख नदारद थीं। मौके पर पहुंची भास्कर टीम को बच्चियों ने बताया वे लसूड़िया गईं हैं। पूछा- आप ऐसे क्यों खड़ी हो? वे बोलीं- मेडम ने सजा दी है, बोलकर गई हैं, जब तक वापस न आऊं खड़ी रहना। किसी ने बता दिया कि बैठ गई थी तो खैर नहीं।
छात्राएं सैकड़ों किमी दूर से माता-पिता को छोड़ यहां पढ़ाई करने आई हैं। शिक्षा विभाग के आवासीय ब्रिज कोर्स के तहत यह छात्रावास चार महीने पहले शुरू हुआ है। गरीब आदिवासी परिवारों की बच्चियों को यहां लाया गया है। बच्चियां कहती हैं- कोई दिन नहीं जाता जब बेंत से पिटाई नहीं होती। पढ़ाई कम ही होती है।
प्रभारी ने बच्चियों को झूठा बताया
दूसरी तरफ होस्टल प्रभारी शगुफ्ता शेख इन आरोपों को नकारती हैं। उनका कहना है कि बच्चियां झूठ बोल रही हैं। बैठे-बैठे पैर दर्द होता है तो खुद ही खड़ी हो जाती हैं। मैं तो उन्हें बड़े प्यार से रखती हूं। शिक्षामंत्री से परिचित होने की धौंस कभी नहीं दी।
आवासीय छात्रावास में पढ़ रही लड़कियों की दयनीय स्थिति को बयां करती तस्वीरों के साथ पढ़े पूरा मामला