इंदौर । 1947 में जब यह तय हो गया कि अंग्रेज भारत छोडऩे के लिए तैयार हैं, डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने गोस्वामी गणेशदत्त महाराज के माध्यम से उज्जैन के पं. सूर्यनारायण व्यास को बुलावा भेजा। पं. व्यास ने पंचांग देखकर बताया कि आजादी के लिए सिर्फ दो ही दिन शुभ हैं। 14 और 15 अगस्त। इसमें एक दिन पाकिस्तान को आजाद घोषित किया जा सकता है और एक दिन भारत को। उन्होंने डॉ. प्रसाद को भारत की आजादी के लिए मध्यरात्रि 12 बजे यानी स्थिर लग्न नक्षत्र का समय सुझाया, ताकि भविष्य में अपनाया जाने वाला लोकतंत्र स्थिर रहे। इतना ही नहीं, पं. व्यास के कहने पर आजादी के बाद देर रात संसद को धोया भी गया था, क्योंकि ब्रिटिश शासकों के बाद अब यहां भारतीय बैठने वाले थे। धोने के बाद उनके बताए मुहूर्त पर गोस्वामी गिरधारीलाल ने संसद की शुद्धि करवाई थी।
कहा था देश की तरक्की 1990 के बाद : आजादी के समय उन्होंने संकेत दे दिए थे कि 1990 के बाद से देश की तरक्की होगी और 2020 तक भारत विश्व का सिरमौर बन जाएगा। इसके बाद से चाहे शनि की दशा में देश को आजादी मिली, देश के टुकड़े हो गए, केतु की महादशा में देश भुखमरी और तंगहाली से गुजरा। मगर 1990 में शुक्र की महादशा शुरू होने के बाद देश की तरक्की भी शुरू हो गई।