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घर बनाने में आड़े आया ‘एक किचन’ का नियम

 
Source: रफी मोहम्मद शेख   |   Last Updated 06:27(05/02/12)
 
 
 
 
इंदौर। आवास एवं पर्यावरण मंत्रालय ने 2008 में स्पष्ट कर दिया था कि नए मास्टर प्लान के निर्माण संबंधी नियम पुरानी कॉलोनियों पर लागू नहीं होंगे। लेकिन नगर निगम ने अपने फैसलों में इन कॉलोनियों को भी शामिल कर लिया है।




छोटे प्लॉट्स पर एक से ज्यादा किचन या आवासीय इकाईयों के निर्माण की अनुमति न मिलने से परेशान शहर की मध्यवर्गीय आबादी के लिए यह एक नया झटका है। नए नियमों के तहत 3100 से 10 हजार स्क्वेयर फीट तक के प्लॉट पर अब अधिकतम चार आवासीय इकाईयां बनाने की ही अनुमति दी जा रही है।



नगर निगम द्वारा शहरी सीमा क्षेत्र में निर्माण कार्यो के लिए नए मास्टर प्लान 2021 के नियम लागू कर दिए गए हैं। इसमें शहरी क्षेत्रों में नए निर्माण के लिए मापदंड निश्चित किए गए हैं। करीब एक साल पहले निगम ने इसके कुछ प्रावधानों को लागू किया था जिसमें 225 से 3099 स्क्वेयर फीट (20 से 288 स्क्वेयर मीटर) तक के प्लॉट पर केवल एक आवासीय इकाई बनाने की अनुमति दी गई है।



इस प्लॉट पर केवल एक किचन ही बनाया सकता है। इसका सीधा-सा अर्थ है कि 3100 स्क्वेयर फीट तक के प्लॉट पर केवल ग्राउंड फ्लोर का ही निर्माण कर सकते हैं। दिसंबर 2011 में निगम ने 3100 से 10000 स्क्वायर फीट तक के प्लॉट्स के लिए नए नियम लागू किए हैं।



इसके मुताबिक उक्त भूखंडों पर चार से ज्यादा आवासीय इकाइयों के निर्माण की अनुमति नहीं होगी। नए नियमों को पहले से बनी कॉलोनियों पर भी लागू कर दिया है जबकि 2008 में प्रदेश शासन ने इसके लिए मना किया था। शहर की बहुसंख्यक मध्यवर्गीय आबादी को प्रभावित करने वाले इस नियम को लागू करने से पहले पार्षदों से राय तक नहीं ली गई। आयुक्त ने मौखिक आदेश से इसे लागू कर दिया।



बिना किसी चर्चा के किया लागू



नगर निगम के अधिकारियों एवं जनकार्य समिति के अध्यक्ष के अनुसार नगर निगम में यह नियम आयुक्त के मौखिक आदेश से लागू किया गया है। पुराने नियमों के आधार पर स्वीकृत हो रहे नक्शों पर रोक लगा दी गई है। इसके लिए कोई लिखित आदेश नहीं दिया गया है और न ही एमआईसी में इसे लागू करने के पूर्व चर्चा करवाई गई। हाल ही में हुई एमआईसी में पार्षदों ने इस नियम का विरोध भी किया था।



निर्माण की जमीन कम हुई

शहर में एक तरफ तो निर्माण के लिए जगह न के बराबर है तो दूसरी ओर नए नियम में बिल्टअप एरिया भी कम कर दिया गया है। नए नियमों में 527 से 807 स्क्वेयर फीट तक के प्लॉट में अब केवल 60 प्रतिशत तक ही बिल्ट अप एरिया रहेगा। जबकि 6460 से 10800 स्क्वेयर फीट तक में ३क् प्रतिशत बिल्टअप एरिया निर्धारित किया गया है यानी बड़े प्लॉट में मात्र एक तिहाई क्षेत्र में निर्माण की अनुमति है।



मध्यवर्गीय परिवारों पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर

साथ नहीं रह सकते परिवार

मध्यवर्गीय परिवार आमतौर पर अधिकतम 1800 स्क्वेयर फीट तक के प्लॉट पर मकान बनाता है। अगर किसी के पास 3000 स्क्वेयर फीट का पैतृक मकान है तो उसमें केवल एक ही किचन बनाने की अनुमति होगी। तीन-चार भाई या संबंधी एक साथ रहना चाहें तो समस्या होगी।



बढ़ जाएंगी जमीन की कीमतें

बिल्टअप एरिया कम होने से जमीनों के भाव कई गुना बढ़ जाएंगे। ५क् प्रतिशत बिल्टअप एरिया वाली जमीनों की कीमतें सीधे दोगुनी हो जाएंगी। जबकि 30 प्रतिशत बिल्टअप एरिया वाली जमीन का रेट वास्तविक निर्माण के अनुसार तीन गुना तक बढ़ जाएगा।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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