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नागपंचमी पर कालसर्प दोष निवारण के लिए विशेष योग

Matrix News | Jul 22, 2012, 02:45AM IST
 
 

सिटी रिपोर्टर. रतलाम
सावन के तीसरे सोमवार को शिव आराधना के साथ18 साल बाद नागदेव पूजन का महायोग बनेगा। 'योतिष की दृष्टि से भी कई दुर्लभ योग बन रहे हैं। जिनको कालसर्प या राहु-केतु दोष हैं उसके निवारण के लिए भी विशेष योग हैं। इसके पहले योग 1994 में आया था और आगे 2030 में आएगा।
हिंदू संस्कृति में भगवान शिव के गले में होने कारण नाग को पूजनीय माना गया है तो 'योतिष ने भी इसे काल माना है। वैसे तो हर पंचमी पर दोष निवारण अनुष्ठान होते हैं लेकिन इस बार नागपंचमी और सोमवार पर पूजन से तिगुना लाभ मिलेगा। 'योतिष रवि जैन बताते हैं सोमवार को केतु के वृषभ और राहु के वृश्चिक राशि में होने से कालसर्प दोष पूजन का 100 गुना अधिक फल मिलेगा।
सदियों पहले से बना महायोग- उ'जैन के 'योतिषाचार्य राजेश त्रिवेदी बताते हैं महाभारत काल में राजा परीक्षित के पुत्र जन्मजय ने नाग जाति को भस्म कर दिया था। तब भोजन शृंखला चलाने व प्रजाति को बचाने के लिए ऋषि आस्तिक ने महाकाल की तपस्या की। इससे नागों को जीवनदान मिला। उस दिन श्रावण शुक्ल पंचमी और सोमवार था। इससे इस दिन का विशेष महत्व है।
राहु व केतु होते हैं नाग के सिर-पैर-'योतिष में राहु-केतु नाग के सिर-पैर माने गए हैं। 'योतिष संजय दवे कहते हैं जन्म कुंडली में जब सारे ग्रह राहु और केतु के मध्य में ((सांप के सिर और पैर के बीच)) होते हैं तो उसे कालसर्प योग कहा जाता है। जिन लोगों को कोई दोष नहीं है उनके लिए पूजन बहुत लाभकारी है। दवे बताते हैं शिव मंदिर में पूजन के साथ नाग देवता के लिए व्रत रखना, मूर्ति पर जल चढ़ाना, नारायण बली और नाग बली का अनुष्ठान करवाना चाहिए।
किस राशि पर क्या असर
शुभमेष, वृश्चिक, मकर, मीन
मध्यम वृषभ, सिंह, कन्या, तुला
साधारणमिथुन, कर्क, कुंभ, धनु
अगर लग्न बलवान है तो कालसर्प दोष शुभ
इन्हें भी था कालसर्प दोष-लोग कालसर्प दोष का नाम सुनते ही डरते हैं लेकिन 'योतिषी बताते हैं कि भारत की कई बड़े लोगों को दोष रह चुका है। 'योतिष संजय दवे बताते है कुछ स्थितियों में दोष शुभ भी होता है। जातक की कुंडली में जन्म स्थान, सूर्य लग्न बलवान हो तो कालसर्प जातक को शिखर पर ले जाता है। हालांकि सोमवार को शिव मंदिर पर जल चढ़ाने और चंदन का तिलक लगाने से भी दोष में लाभ होता है। 'योतिष अनुसार इंदिरा गांधी, बेनजीर भुट्टो, महारानी विक्टोरिया, लेडी डायना को भी यह दोष था।
सात्विक उपायों से भी होगा लाभ
-शिव मंदिर में नाग-नागिन का जोड़ा गुप्त रूप से अर्पित करें।
- नागपंचमी के दिन मोर के पंख को पूजन कक्ष में रखें। इससे नाग का भय नहीं रहता।
- आटे का नाग बनाकर पूजन करने से दोष दूर होता है।
- राम-कृष्ण या विष्णु मंदिर के पास तुलसी पौधा, शिव मंदिर पर बिल्व-पत्र या चंदन का पौधा लगाएं।
कृपया इसे नागपंचमी की खबर के साथ जोड़ें
-विनोबानगर स्थित संकट हरण नागदेव मंदिर में मंगलवार शाम 5 बजे महाआरती होगी। विनोबानगर सेक्टर-ए में नागपंचमी के उपलक्ष्य में कार्यक्रम होगा। पंडित श्यामसुंदर दुबे ने भक्तजन से महाआरती में भाग लेने का आग्रह किया है।
फोटो- २१ जुलाई आरटीएम-एस-७
कैप्शन- भगवान जागनाथ महादेव।
सिटी रिपोर्टर. रतलाम
नागपंचमी पर राजपूत नवयुवक मंडल व महिला मंडल के तत्वावधान में राजपूत धर्मशाला हाथीखाना स्थित भगवान जागनाथ महादेव का सहस्रधारा अभिषेक होगा। प्रवक्ता राजेंद्रसिंह गोयल ने बताया शाम ५ बजे मंदिर में अभिषेक फिर आरती होगी। समाज के हिम्मत सिंह, कोमल सिंह, भंवर सिंह, कैलाश सिंह, राजेंद्र पंवार, सुरेंद्र वाघेला, प्रहलाद सिंह आदि ने श्रद्धालुओं से भाग का आग्रह किया है।
 
 
 

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