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‘पहले बेटे का एनकाउन्टर किया, अब वकील को फंसा दिया’

 
Source: dainik bhaskar news   |   Last Updated 07:03(05/02/12)
 
 
 
 
जबलपुर. एक महिला ने शहडोल पुलिस पर सनसनीखेज आरोप लगाया है कि पहले उसके बेटे को वहां के एक टीआई समेत 15 पुलिस वालों ने फर्जी एनकाउन्टर में मार डाला और जब उसने न्याय पाने अदालत की शरण ली, तो पुलिस ने उसके वकील को भी झूठे मामले में फंसा दिया।



खाकी वर्दी के ऐसे रवैये के खिलाफ पीड़ित महिला ने हाईकोर्ट की शरण में आकर पुलिस वालों को दी गई जमानतें निरस्त करने की प्रार्थना की है। जस्टिस एनके गुप्ता की एकलपीठ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए शहडोल आईजी से रिपोर्ट बुलाई है, क्योंकि मामले में उन पर भी आरोप लगाए गए हैं। शहडोल निवासी कृष्णा यादव की ओर से दायर इस मामले में कहा गया है कि उसके पुत्र राजकुमार यादव को वहां के करीब 15 पुलिस वालों ने फर्जी एनकाउन्टर में मार डाला था। आवेदक ने इस बारे में एक परिवाद शहडोल के सीजेएम के समक्ष दायर किया, लेकिन अदालत ने उस पर संज्ञान लेने से इंकार करते हुए परिवाद खारिज कर दिया।



इसके खिलाफ आवेदक ने पुनरीक्षण याचिका लगाई और जिला न्यायालय ने 17 मई 2010 को प्रकरण वापस सीजेएम को सुनवाई के लिये भेजा। जिला न्यायालय के फैसले को पुलिस वालों ने हाईकोर्ट में चुनौती तो दी, लेकिन वो 13 दिसंबर 2010 को खारिज कर दिया गया। इसके बाद निचली अदालत में तत्कालीन टीआई जगत बहादुर सिंह और तीन एसआई समेत कुल 15 पुलिस वालों पर मामला दर्ज हो गया। इस मामले में आरोपी पुलिस वालों को शहडोल के सेशन जज की अदालत से अग्रिम जमानत का लाभ मिल गया था।



आवेदक का आरोप है कि आरोपी पुलिस वालों की जमानत निरस्त करने हाईकोर्ट में अर्जी तो दायर की गई, लेकिन संबंधित वकील ने उसमें ढंग से पैरवी नहीं की और नतीजतन उसकी अर्जी बल न देने के कारण खारिज कर दी गई। इसकी शिकायत आवेदक ने स्टेट बार काउंसिल में की है। आवेदक का यह भी आरोप है कि निचली अदालत में उसके परिवाद में पैरवी कर रहे अधिवक्ता दिनेश दीक्षित को पुलिस ने अपने निशाने में लिया। तत्कालीन टीआई जगत बहादुर सिंह चंदेल और अन्य पुलिस वालों ने पहले अधिवक्ता श्री दीक्षित को धमकाया।


इस घटना की बाकायदा शहडोल एसपी को सितंबर 2011 में शिकायत भी की गई। आवेदक का आरोप है कि शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय शहडोल पुलिस ने वहां के आईजी अरुण प्रताप सिंह के इशारे पर अधिवक्ता दीक्षित को एक झूठे मामले में आरोपी बना दिया। इन आधारों पर महिला ने यह अर्जी देकर सभी पुलिस वालों की जमानतें निरस्त करने की प्रार्थना हाईकोर्ट से की है।मामले पर हुई प्रारंभिक सुनवाई के दौरान आवेदक की ओर से अधिवक्ता पीएन पाठक ने अपना पक्ष रखा। सुनवाई के बाद अदालत ने पाया कि इस मामले में शहडोल आईजी की भूमिका भी विवादों में है, लिहाजा कोई भी आदेश देने से पहले आरोपों को लेकर आईजी और एसपी से रिपोर्ट बुलाई जाए। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई मार्च के दूसरे सप्ताह में निर्धारित की है।



पहले मांगे 15 लाख, अब दुकान कर दी ट्रांसफर!: बुरहानपुर के एक शराब ठेकेदार का वहां के जिला आबकारी अधिकारी पर आरोप, हाईकोर्ट ने मांगा जवाबबुरहानपुर के दो शराब ठेकेदारों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करके आरोप लगाया है कि वहां के जिला आबकारी अधिकारी ने उससे 15 लाख रुपए मांगे। न देने पर उसकी दुकान किसी और को आवंटित कर दी गई। जस्टिस केशव कुमार त्रिवेदी की एकलपीठ ने याचिका में लगाए गए आरोपों पर प्रदेश सरकार व अन्य से जवाब तलब किया है।



बुरहानपुर के संदीप बंदिल और राजेन्द्र कुमार पटेल की ओर से दायर इस याचिका में कहा गया है कि वो देशी शराब की दुकान संचालित करते हैं। याचिका में आरोप है कि विगत 2 जनवरी को आवेदक संदीप को वहां के जिला आबकारी अधिकारी भवानी प्रसाद भरके ने बुलाया और उससे 15 लाख रुपयों की मांग की। रकम न देने पर आवेदक को झूठे मामले में फंसाने की धमकी भी दी गई। आवेदक का आरोप है कि आबकारी अधिकारी के ऐसे रवैये के चलते उसने विगत 9 जनवरी को एक आवेदन दिया कि उसकी दुकान राजेन्द्र पटेल के नाम पर स्थानांतरित की जाए।



इसके बाद आवेदक को पता चला कि उसकी दुकान प्रमोद पुरी नामक व्यक्ति के नाम पर ट्रांसफर कर दी गई। याचिका में आरोप है कि जिला आबकारी अधिकारी द्वारा आवेदक के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण तरीके से कार्रवाई की जा रही है, क्योंकि उसकी ही शिकायत पर लोकायुक्त की टीम ने आबकारी अधिकारी श्री भरके के यहां छापा मारकर अनुपातहीन संपत्ति बरामद की थी। आवेदक का कहना है कि उसके नाम पर आवंटित दुकान किसी और को ट्रांसफर करने का अधिकार आबकारी अधिकारी को नहीं था, लेकिन फिर भी उन्होंने ऐसा किया।



इस बारे में बुरहानपुर कलेक्टर के अलावा उच्च अधिकारियों से शिकायत करने के बाद भी मामले पर कोई कार्रवाई न होने पर यह याचिका दायर की गई।मामले पर हुई प्रारंभिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह ने अपना पक्ष रखा। सुनवाई के बाद अदालत ने याचिका में अनावेदक बनाए गए प्रदेश सरकार के वाणिज्य कर विभाग के प्रमुख सचिव, आबकारी आयुक्त, खण्डवा के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, कोतवाली थाना प्रभारी, जिला आबकारी अधिकारी भवानी प्रसाद भरके, सहायक आबकारी अधिकारी राधेश्याम बिरला और प्रमोद पुरी को नोटिस जारी करने के निर्देश दिये।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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