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रिहा करो अर्जुन को, हाईकोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

 
Source: Dainik Bhaskar News   |   Last Updated 03:16(10/02/12)
 
 
 
 
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जबलपुर। हाईकोर्ट ने उमरिया में रहने वाले उस अर्जुन सिंह को रिहा करने के आदेश दिये, जिसे वहां के कलेक्टर ने राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (मीसा) के तहत हिरासत में लिया था। अजरुन को नियमानुसार हाईकोर्ट के सलाहकार बोर्ड के सामने पेश न करने को गंभीरता से लेते हुए एक्टिंग चीफ जस्टिस सुशील हरकौली और जस्टिस टीके कौशल की युगलपीठ ने यह फैसला दिया। उमरिया जिले के मानपुर थानांतर्गत ग्राम माला में रहने वाली अनुराधा सिंह की ओर से दायर इस याचिका में कहा गया था कि वहां के कलेक्टर ने 11 अगस्त 2011 को एक आदेश पारित किया।

रासुअ के तहत पारित उक्त आदेश के जरिये उसके पुत्र अजरुन सिंह को हिरासत में ले लिया गया। कलेक्टर द्वारा की गई कार्रवाई को अवैधानिक बताते हुए यह याचिका दायर की गई थी। इस मामले पर 28 नवम्बर को सुनवाई के बाद युगलपीठ ने सरकार को जवाब पेश करने के लिये चार सप्ताह का समय दिया था। इसके बाद 24 जनवरी और 7 फरवरी को भी सुनवाई हुई, लेकिन सरकार का जवाब नदारद था।

7 फरवरी को याचिकाकर्ता ने इस आशय का शपथपत्र कोर्ट के समक्ष पेश किया कि उसके पुत्र को हिरासत में लेने के बाद सलाहकार बोर्ड के सामने पेश नहीं किया गया। इस बीच युगलपीठ ने हाईकोर्ट के सलाहकार बोर्ड के रिकॉर्डो का अवलोकन करने के बाद पाया कि अजरुन सिंह से संबंधित कोई भी प्रकरण बोर्ड के सामने पेश नहीं हुआ, ताकि मीसा के आदेश की पुष्टि हो सके। इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए युगलपीठ ने उमरिया कलेक्टर की कार्रवाई को निरस्त करते हुए आवेदक के पुत्र को तत्काल रिहा करने के निर्देश दिये। आवेदक की ओर से अधिवक्ता घनश्याम पाण्डेय ने पैरवी की।

रजिस्ट्रार का आदेश दुर्भाग्यपूर्ण
हाईकोर्ट ने सागर जिले के गौरझामर में स्थित देव दत्तात्रेय पब्लिक ट्रस्ट में नये ट्रस्टियों के नामों को जोड़ने के संबंध में वहां के रजिस्ट्रार द्वारा पारित आदेश को दुर्भाग्यपूर्ण बताकर खारिज कर दिया है। जस्टिस अजीत सिंह और जस्टिस संजय यादव की युगलपीठ ने पूर्व विधायक रतन सिंह लोधी की याचिका पर सुनवाई के बाद पुराने ट्रस्टियों के नाम पूर्ववत रजिस्टर पंजी में दर्ज करने को कहा है।

आवेदक रतन सिंह की ओर से दायर इस याचिका में कहा गया था कि उनकी नानी ने अपने पति की इच्छा के मुताबिक उक्त मंदिर का निर्माण वर्ष 1943 में कराया था। याचिका में आरोप था कि मंदिर की संपत्तियों को हड़पने के उद्देश्य से मंदिर के पुराने ट्रस्टियों को हटाने की साजिश रची गई। 15 दिसंबर 2004 को वहां के रजिस्ट्रार पब्लिक ट्रस्ट ने रतन सिंह सिलारपुर, मेहरबान सिंह लोधी, ओमकार सिंह लोधी, करोड़ी सिंह लोधी की नियुक्ति ट्रस्टी के रूप में की और अरुण कुमार शेण्डे व ध्रुव पाठक को ट्रस्टी के पद से हटा दिया। इस आदेश की वैधानिकता को अंतत: हाईकोर्ट में चुनौती दी गई। युगलपीठ ने मामले पर अपना फैसला सुनाते हुए रजिस्ट्रार के आदेश को निरस्त कर दिया। आवेदक की ओर से अधिवक्ता रामेश्वर पी. सिंह ने पैरवी की।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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