भोपाल. मध्य प्रदेश में चलने वाले सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में अब बच्चों की वह पत्रिका पढ़ाई जा रही है, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा संचालित सरस्वती शिशु मंदिरों में पहले से ही पाठ्यक्रम का हिस्सा है। बाल पत्रिका-देवपुत्र की हजारों कॉपियां राज्य के 83,400 प्राथमिक विद्यालयों में पहुंच चुकी है। इस पत्रिका का प्रकाशन इंदौर के सरस्वती बाल कल्याण न्यास ने किया है। 1.3 लाख सर्कुलेशन का दावा करने वाली इस मासिक पत्रिका पहले आरएसएस के प्रमुख रह चुके एम एस गोलवलकर पर विशेषांक छाप चुकी है।
आरएसएस के वरिष्ठ पदाधिकारी कृष्ण कुमार अस्थाना इस पत्रिका को प्रकाशित करने वाले ट्रस्ट, सरस्वती बाल कल्याण न्यास के प्रमुख हैं। इस पत्रिका के प्रकाशन से मध्य प्रदेश सरकार के खजाने पर 1.5 करोड़ का बोझ बढ़ेगा। विद्यालय शिक्षा विभाग ने पिछले हफ्ते ब्लॉक रिसोर्सेज कोऑर्डिनेटरों से इस पत्रिका की सरकारी स्कूलों में सप्लाई को सुनिश्चित करने को कहा है। हर स्कूल को इस पत्रिका की दो प्रतियां मिलेंगी। पत्रिका के प्रबंध संपादक विकास दवे के मुताबिक उन्होंने पत्रिका में कोई बदलाव नहीं किया है।
पिछले साल जब बीजेपी सरकार ने इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाया था, तभी शिक्षा विभाग ने इस बात पर चिंता जाहिर की थी कि सर्व शिक्षा अभियान का ज्यादातर फंड इस पत्रिका के प्रकाशन और वितरण पर खर्च होगा। हालांकि, मध्य प्रदेश की शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनिस ने कहा, बच्चों को अच्छी किताबें पढ़वाना गलत नहीं हैं। वहीं, कांग्रेस ने इसे स्कूली बच्चों का भगवाकरण करार दिया है। गौरतलब है कि कांग्रेस और बीजेपी एक-दूसरे पर पाठ्यक्रम में अपनी राजनीतिक सहूलियत के हिसाब से बदलाव करने का आरोप लगाते रहे हैं। यह विवाद केंद्र सरकारों में भी रहा है।