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रिश्तों में पड़ जाएगी दरार, न करें तीन बार 'तलाक' का इस्तेमाल!

 
Source: राजेश चंचल   |   Last Updated 09:44(28/12/11)
 
 
 
 
भोपाल. टूटते रिश्तों को बचाने के लिए मुस्लिम समाज में अब नसीहत दी जा रही है कि कोई शौहर (पति) गुस्से में तलाक शब्द का इस्तेमाल एक साथ तीन बार न करे। ऐसा करने से उनका निकाह टूट जाएगा। इसके लिए मस्जिदों, मदरसों, धार्मिक संस्थाओं के कार्यक्रमों से लेकर घर-घर में होने वाले मजहबी जलसों में लोगों को सीख दी जा रही है।


यह मुहिम तलाक के बढ़ते मामलों के मद्देनजर रखते हुए छेड़ी गई है। इसका जिम्मा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने उठाया है। बोर्ड ने फिलहाल बैठकों, जलसों व मजलिसों में काजी व उलेमाओं से कहना शुरू कर दिया है कि वे अपने-अपने तरीके से लोगों को इस आशय की समझाइश दें। इस सिलसिले में बोर्ड ने कोई कार्यक्रम तो घोषित नहीं किया है, लेकिन उसके सदस्य विभिन्न शहरों का भ्रमण करके लोगों को जागरूक कर रहे हैं।


गौरतलब है कि अकेले भोपाल में 10 से 20 फीसदी तलाक के मामले अदालत में पहुंचते हैं, जबकि अन्य मुस्लिम बाहुल्य शहरों में यह आंकड़ा कहीं अधिक है। इस बात की पुष्टि वकील मेहबूब अंसारी ने करते हुए बताया कि धार्मिक अज्ञानता के चलते कई लोग तलाक शब्द का अनुचित उपयोग कर रहे हैं।


इस मामले में मसाजिद कमेटी अध्यक्ष हकीम कुरैशी ने बताया कि कमेटी ने दफ्तर में एक परामर्श केंद्र भी खोलने का निर्णय लिया है, ताकि तलाक विवाद अदालत में पहुंचने के पहले सुलझा लिया जाए। उधर, नए शहर काजी सैयद मुश्ताक नदवी के अनुसार अक्सर यह बात सामने आती है कि कई शौहर गुस्से पर काबू नहीं रख पाते।


पत्नी से विवाद होने पर तैश में तीन बार तलाक शब्द बोल देते हैं। बाद में जब गुस्सा उतरता है, तो वे पछताते हैं, तब कुछ हाथ नहीं आता। इधर, पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य आरिफ मसूद ने कहा कि बोर्ड तलाक मामले में लोगों को जागरूक कर रहा हैं। इस मामले में भोपाल आए बोर्ड के पदाधिकारी मो. वली रहमानी बुधवार को लोगों से चर्चा करेंगे।


आल इंडिया मुस्लिम त्योहार कमेटी के अध्यक्ष डॉ. औसाफ शाहमीरी खुर्रम का कहना है कि उनकी समिति के पदाधिकारी पूर्व से विभिन्न जलसों में लोगों को समझा रहे हैं कि किसी भी सूरत में तीन बार तलाक शब्द न बोला जाए। कोई मजबूरी आए तो अपने बुजुर्गो के साथ बैठक कर मसला सुलझा लें लेकिन एक बार भी तलाक शब्द न बोलें। वहीं, काजी अजमत शाह मक्की ने बताया कि शरीअत के मुताबिक पति-पत्नी में बात बिगड़ने पर शौहर एक बार तलाक बोलता है, तो उनके बीच समझौते की गुंजाइश रहती है। एक बार तलाक बोलने के तीन माह के भीतर दोनों एक दूसरे से मिल सकते हैं, एक बार कहे गए तलाक शब्द को तलाक नहीं माना जाता।

किस आधार पर होता है तलाक

पति-पत्नी दोनों में से किसी एक का क्रूर व्यवहार हो, दो साल से अधिक समय से साथ न रह रहे हो। पत्नी का आचरण सही न हो। दोनों में कोई एक पागल हो। इसमें तीन तलाक जरुरी है इसके तहत तलाक-ए- बाइन, तलाक-ए- रज्जई और तलाक-ए- मुगललेजा का होना जरुरी है। साथ ही तीन तलाक के दौरान दो लोगों की गवाही और सुलह पसंद काजी की उपस्थिति अनिवार्य है।


मुस्लिम परिवारों में तलाक के मामले रोकने की दिशा में की जा रही तमाम कोशिशों में यह भी शामिल है कि लोगों को आगाह किया जाए कि वे एक बार और तीन बार तलाक कहने के अंतर को समझें। एक बार तलाक बोलने पर सुलह की गुंजाइश रहती है।


- मौलाना रहीम कुरैशी, हैदराबाद, एडीशनल जनरल सेकेट्री,आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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