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Home >> Madhya Pradesh >> Rajya vishesh >> Navneet Gurjar Comment On Bad Roads Of Madhya Pradesh

खराब सड़कें, सरकार और हम

नवनीत गुर्जर | Nov 27, 2012, 02:14AM IST
 
 


पीढिय़ां गुजर गईं। कई सड़कें 25-30 साल पहले जैसी थीं, आज भी वैसी ही हैं। खराब। और खराब। गड्ढे बड़े ही हुए हैं। भरे नहीं गए। 40-45 की उम्र के लोग बात करते हैं- जब से होश संभाला- ये सड़क ऐसी ही है। क्या, किसी सरकार का कोई मंत्री यहां से कभी गुजरा ही नहीं होगा? सामने से साइकिल वाला भी आए तो कार नीचे उतारनी पड़ती है। नीचे उतारो तो दोनों पहिए इतने टेढ़े हो जाते हैं कि लगता है- कार पलटेगी। चार दशक हो गए। कष्ट भोगते। कराहते। चिल्लाते। मरते। गढ़ते . . .। और सरकार इन सड़कों पर हेमामालिनी के आने की राह तकती रही। अब जागी है। दरअसल, सरकार कांग्रेस की हो या भाजपा की, स्वभाव एक जैसा ही होता है। क्योंकि इसे चलाने वाले अफसर और कुछ हद तक ठेकेदार, वही या वैसे ही होते हैं। वे कभी नहीं बदलते। कभी नहीं जागते। कभी नहीं सुनते। आम आदमी की बात सरकार को सुनाना आज भी दिवास्वप्न है। यहां हंगेरियन कवि आतिला योजेफ की पंक्तियां मौजूं हैं-


दूध के दांतों से तूने, चट्टानों को तोडऩा चाहा।
क्या सपने देखने के लिए, एक रात काफी न थी!

 
 
 

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