जबलपुर. बहुत जल्दी एक-दो नहीं, बल्कि सारी ट्रेनों से पेन्ट्रीकार की व्यवस्था एकदम समाप्त होने वाली है। हालांकि इसका मतलब ये नहीं है कि यात्रियों को भोजन के लाले पड़ने वाले हैं।
मुसाफिरों को आहार मिलेगा, बराबर मिलेगा और संभावना तो यहां तक है कि पहले से ज्यादा बेहतर इंतजाम होंगे। रेल बोर्ड ने आदेश जारी कर दिये हैं और इधर अधिकारियों ने तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। हालांकि अभी तक इसकी कोई समय-सीमा तय नहीं की गई है।
यही सही है
कई तरह की समस्याओं से बचने के लिये यही सही है कि ट्रेनों से पेन्ट्रीकार को अलग कर दिया जाए और कोई ठोस और विश्वसनीय व्यवस्था की जाए। बोर्ड के आदेश पर अमल की तैयारियां शुरू कर दी गई हैं।
-अनिल कुमार गुप्ता, डीआरएम
पेन्ट्रीकार के अलविदा कहने के बाद यात्रियों को स्टेशनों की रसोईघरों मंे बना हुआ खाना मिलेगा। रेलवे की योजना के अनुसार बड़े और मझौले स्टेशनों पर किचिन बेस बनाये जाएंगे। जहां पर सिर्फ ट्रेनों में परोसने के लिये खाना बनाया जाएगा। यहां लंच से लेकर डिनर तक का सारी व्यवस्था की जाएगी। देखा जाएगा कि कौन सी ट्रेन, कब, किस स्टेशन पर पहुंचेगी और उसी शेडच्यूल के हिसाब से भोजन तैयार किया जाएगा।
एक बोगी और
पेन्ट्रीकार के गायब होने के बाद ट्रेन में एक और बोगी जोड़ी जा सकती है, जो यात्रियों के बैठने काम आएगी। इससे यात्रियों को फायदा मिलेगा। हालांकि ये बोगी किसी भी दर्जे की हो सकती है, ये निर्णय ट्रेन के हिसाब से किया जाएगा।
फिर टेंशन कहां
रेलवे के अधिकारी पेन्ट्रीकार के कारण कई तरह की परेशानियांे का सामना करते हैं। अव्वल तो ट्रेनों में गंदगी फैलने का डर, उसके बाद अवैध वेण्डरों की आमदरफ्त और सबसे बड़ी टंेशन मुसाफिरांे के शिकवे-गिले। इन तीनों मुश्किलों से अब रेलवे अफसर मुक्त हो सकेंगे तो मुसाफिर भी अब खाने को लेकर शंकित नहीं होंगे। शिकायत होने पर खाने को तत्काल चैक किया जा सकेगा और भोजन निर्माण की गुणवत्ता परखने के लिये कभी भी पड़ताल की सहूलियत भी होगी