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आइए, अंधेरे आंगन में भी बांटें अपने दीये की रोशनी

Dainik Bhaskar News | Nov 12, 2012, 02:34AM IST
आइए, अंधेरे आंगन में भी बांटें अपने दीये की रोशनी

कोना-कोना जैसे खुशियों की महकती हुई क्यारी बन गया है। यही तो दिवाली की खासियत है। मनुष्य की सुख-समृद्धि की कामनाओं के इस महापर्व की वाकई कोई मिसाल नहीं है। ऊर्जा और प्रकाश का अद्भुत त्योहार। आइए, इस महापर्व को पूरे उल्लास से मनाने के साथ-साथ कुछ सार्थक भी करें। जरूरतमंदों में थोड़ी मिठास बांटें। किसी बच्चे के हाथ में फुलझडिय़ां थमाएं। किसी जरूरतमंद को नए वस्त्र दें। फिर उनके चेहरों पर आई रौनक अपने दिल में महसूस कीजिए। दिवाली दिल से मनाइए। एक सार्थक और स्मरणीय दिवाली।


हमें यह स्मरण रखना होगा कि ईश्वर ने जिन्हें सब कुछ दिया है, उनका जिम्मा भी बड़ा है। हमारे समाज में कोई सबल है तो किसी को सहारे की आस भी है। इस दिवाली हम ही क्यों न उनका सहारा बन जाएं? अगर नए कपड़ों, मिठाइयों, फल, पटाखों में हम सबकी खुशियां समाई हैं तो यही चीजें उनके लिए भी उतनी ही अहम हैं। तो अपने दीये की थोड़ी सी रोशनी किसी अंधेरे आंगन में ले जाना मत भूलिए।


मानव सभ्यता के विकास में पर्व और परंपराओं की अहम भूमिका रही है। इनसे जिंदगी खुशियों के अहसास से भरी है। जैसे-दिवाली। अब इन तीज-त्योहारों में नए अर्थ जोडऩे की जरूरत है। रोशनी के इन पलों में याद रखिए खुशियां बांटने से बढ़ती हैं। एक दीया हजारों दीयों को रोशन करने की सामथ्र्य रखता है। इस पर्व पर हम भी कोशिश करें एक ऐसा दीया बनने की जो अंधेरे आंगन में रोशनी फैलाए। आइए, कम से कम दो-चार अंधेरे आंगन में रोशनी फैलाकर हम सब मनाएं सार्थक दिवाली।


शुभकामनाओं के साथ
रमेशचंद्र अग्रवाल
चेयरमैन, दैनिक भास्कर समूह

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