नरसिंहपुर.नाटक-नौटंकी और रामलीला में नाच, गाना और अभिनय के बीच पता नहीं कब दो युवक प्रेमपाश में बंध गये। दोनों के बीच प्रेम प्रगाढ़ होता गया। प्रेमिका की भूमिका से एकदम आगे बढ़कर 23 वर्षीय नर्मदाप्रसाद नर्तक, तबलावादक 25 वर्षीय राजेश रजक को सचमुच दिल दे बैठा।
तीन साल दोनों साथ-साथ रहे थे, दोनों के नयन मिलते, शर्मीली प्रेमिका की तरह नर्मदाप्रसाद आंखें मिलते ही शर्म से लाल हो जाता। उसके हावभाव मोहब्बत में सब कुछ लुटा देने के होते। प्रेमी राजेश अगर आंखों से ओझल होता तो नर्मदा व्याकुल हो जाता।
मगर एक दिन प्रेमी राजेश रजक ने कहीं और सगाई कर ली। इसकी खबर लगते ही प्रेमिका बने नर्मदा के हाथों के जैसे तोते उड़ गये। वह होशोहवास खो बैठा। उसे तन-मन की सुध नहीं रही। गहरी निराशा और प्रेमी से हमेशा के लिए नाता तोड़ने की कल्पना से ही वह इतना विचलित हो गया कि फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली।
ग्राम बढ़ैयाखेड़ा निवासी नर्मदा प्रसाद उफ गुड्डू लड़कपन छूटते-छूटते खुद भी सामान्य र्ढे से दूर होने लगा था। वह एकांतप्रिय, अंर्तमुखी होता गया। गांव घर-परिवार से वह मानसिक तौर पर दूर होता गया। फिर उसने गांव घर छोड़ दिया और रामलीला मंडली में नाचने-गाने लगा।
यहीं उसकी खाली जिंदगी में राजेश का प्रवेश हुआ। तबलावादक राजेश से मिलते ही नर्मदा उर्फ गुड्डू की वीरान जिंदगी में जैसे बहार आ गई। वह खुशी से चहकने लगा।
वह स्त्रियों का साज-श्रृंगार, चोटी, बिंदिया, चूड़ी, कंगन, माहुर आदि से सजधज कर अपने आरोपित प्रेमी राजेश को लुभाने लगी उस पर न्यौछावर होने लगा पर पुरूष के बीच यह प्रेम अस्वाभाविक था और तय था कि यह सपना टूटना और दिल तोड़ने वाली हकीकत आंख खोलती। कथित प्रेमी की सगाई की खबर ने नर्मदा उर्फ गुड्डू को तोड़कर रख दिया। वह एकदम गुमसुम और उदास रहने लगा।
माथे पर लिखा था प्रेमी का नाम
नर्मदा तट पर ग्राम भैंसा के पास उसकी मंडली का डेरा था। गुड्डू भी वहीं था। 4 फरवरी को अचानक वह यह कहकर ग्राम भैंसा चला गया कि उसके गुरू कन्हैयालाल लोधी की तबीयत खराब है इसलिए वह जा रहा है।
गुड्डू सचमुच भैंसा गया। उसके गुरू कन्हैया उस समय वहां नहीं थे। जब वे गांव लौटे तो गुड्डू शासकीय स्कूल के पास एक टपरिया के ठाठ से लटका मिला। उसने पूरा स्त्री श्रृंगार किया था और गालों पर राजेश नाम लिखा था।