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शिकारी जेल भेजे गए, कॉल डिटेल से होगा गिरोह का पर्दाफाश

Matrix News | Dec 12, 2012, 06:05AM IST
विशेष संवाददाता-!-भोपाल
बाघ के शिकार की जांच कर रहे वन विभाग के हाथ दो मोबाइल, बाघ के दांत-नाखून व वो औजार हाथ लग गए हैं, जिनसे बाघ की खाल उतारी गई। मोबाइल की कॉल डिटेल की जानकारी के लिए जांच टीम ने पुलिस को लिख दिया है। दूसरी तरफ शिकार के पांचों आरोपियों को मंगलवार को जेल भेज दिया गया।
उमरिया डीएफओ आरपीएस बघेल ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में से सुखसेन और रामसिंह के नाम से मोबाइल मिला है। इसकी कॉल डिटेल से पता लगेगा कि पिछले कुछ दिनों से ये किससे संपर्क में थे। वन विभाग को संदेह है कि शिकार के बाद बाघ के पाट्र्स का सौदा होना था। इसका भरोसा शहडोल में रहने वाले आरोपियों के कुछ रिश्तेदारों ने दिया था। जांच टीम शहडोल के सरसी व गदराटाला गई थी लेकिन उनके हाथ कुछ नहीं लगा। गिरफ्तार आरोपियों ने बयान में धौरई गांव के एक शख्स भोला का नाम लिया था लेकिन वह घटना वाले दिन से ही फरार है।
00 टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के लिए रा'यपाल को पत्र
प्रयत्न संस्था के सचिव अजय दुबे ने बाघ के शिकार के मामले में रा'यपाल रामनरेश यादव को पत्र लिखा है। इसमें बताया गया है कि राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण ने 11 मई 2009 को मप्र के प्रधान मुख्य वन संरक्षक ((वन्यजीव)) से कहा था कि सभी टाइगर रिजर्व में स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स ((एसटीपीएफ)) का गठन तत्काल किया जाए। पुलिस कर्मियों को प्रतिनियुक्ति पर लेकर भी यह फोर्स बनाई जा सकती है। आज तक प्रदेश सरकार ने इस मामले में कोई कार्यवाही नहीं की। दुबे का कहना है कि पिछले छह माह में आधा दर्जन बाघों की मौत शिकार अथवा किसी अन्य कारण से हुई है। प्रदेश में 6 टाइगर रिजर्व हैं जिनमें 257 बाघ हैं। इनकी सुरक्षा खतरे में हैं।
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