भुवनेश्वर। ओडिशा में नशीली दवाएं पीने से 30 लोगों की मौत हो जाने पर इसकी जिम्मेदारी लेते हुए ओडिशा के अबकारी मंत्री ए यू सिंघदेव ने इस्तीफा दे दिया है। सीएमओ सूत्रों के मुताबिक सिंघदेव ने इस घटना की नैतिक जिम्मेदारी ली है।
वैसे अधिकारियों ने इसके लिए दो दवाओं को जिम्मेदार ठहराया है। मरने वालों में ज्यादातर कटक व खोर्दा जिलों के गरीब लोग हैं। ये लोग मंगलवार को कथिततौर पर नशीला पेय पीने के बाद बीमार पड़ गए थे। इस पेय में सर्दी-खांसी के इलाज व घावों की मरहम-पट्टी में इस्तेमाल होने वाली दवाएं मौजूद थीं।
कटक के जिला कलेक्टर एस.एन. गिरीश ने बताया, "बुधवार रात एक और व्यक्ति की मौत हो गई। इस तरह मरने वालों की कुल संख्या 30 हो गई है।"उन्होंने बताया कि तीन महिलाओं सहित 50 लोगों का कटक के एक अस्पताल में इलाज चल रहा है। सभी की हालत स्थिर है। गिरीश ने बताया कि मरने वालों में नशीली दवा विक्रेता भैधर भोई भी शामिल है।
मंगलवार सुबह सबसे पहले उसी की मौत हुई। राज्य सरकार ने शुरुआती जांच के बाद कहा है कि इपीकार्म और कंसनट्रेटेड सिनामोन नाम की दो दवाओं के चलते लोग बीमार हुए और मौतें हुईं। अधिकारियों ने कहा कि कई इलाकों के लोग सोमवार की रात नशीली दवा खरीदने के लिए यहां से 25 किलोमीटर दूर स्थित कटक जिले के तुकुलीयापाड़ा गांव गए थे। दोनों जिलों में दवा की अलग-अलग दुकानों से यही दवाएं खरीदकर पीने वाले ईंट भट्टों में काम करने वाले सैकड़ों श्रमिक व अन्य लोगों को भी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
गिरीश ने बताया कि मंगलवार तक 13 लोगों की मौत हो गई थी और बुधवार को 17 लोग मरे। दो महिलाओं की भी मौत हो गई। अब मरने वालों की संख्या और बढ़ने का खतरा नहीं है क्योंकि अस्पतालों में भर्ती लोगों के स्वास्थ्य में सुधार हो रहा है। पुलिस ने इन दवाओं की बाजार में अब भी उपलब्धता का पता लगाने के लिए बुधवार व गुरुवार को राज्य के विभिन्न हिस्सों में दवा की दुकानों पर छापेमारी की।
उसने भुवनेश्वर में भी दो दवा निर्माता कम्पनियों में छापेमारी की और उन पर मामले के सरगना भोई और विभिन्न दुकानों को कथिततौर पर यह दवा उपलब्ध कराने का आरोप लगाया। पुलिस ने बताया कि दो मामले दर्ज किए गए हैं और अब तक 10 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। गिरफ्तार लोगों में भोई के तीन रिश्तेदार व दवा कम्पनियों के सात अधिकारी शामिल हैं।