5 खामियां: जो राहुल गांधी की नेता बनने की राह में हैं रोड़ा
नई दिल्ली. राहुल गांधी के व्यक्तित्व का विश्लेषण करते हुए मशहूर पत्रिका 'द इकॉनमिस्ट' ने कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को 'एक समस्या' करार दिया है। 'द राहुल प्रॉब्लम' शीर्षक से पत्रिका ने राय दी है कि राहुल को बड़ी जिम्मेदारी लेनी चाहिए, क्योंकि यह कांग्रेस के हित में होगा। 'द इकॉनमिस्ट' ने लिखा है, 'राहुल गांधी जिम्मेदार पद लेने से कतराते रहे हैं। वे यूथ विंग और क्षेत्रीय चुनावों में पार्टी की अगुवाई करते रहे हैं। इन दोनों मामलों में उन्हें खास कामयाबी हासिल नहीं हुई है। 'द इकॉनमिस्ट' के मुताबिक, 'राहुल गांधी के साथ बड़ी समस्या यह है कि उन्होंने न तो अभी तक एक नेता के तौर पर अपनी योग्यता दिखाई है और न ही बड़ी जिम्मेदारी के लिए उनके भीतर कोई तत्परता दिखती है। वे शर्मीले हैं। उनकी छवि पत्रकारों, जीवनीकारों, संभावित साझेदारों और राजनीतिक विरोधियों से बात करने में झिझकने वाले नेता की है। राहुल गांधी संसद में भी अपनी आवाज़ नहीं बुलंद करना चाहते हैं। कोई नहीं जानता है कि वे कितने काबिल हैं? या कभी भी सत्ता और जिम्मेदारी मिलने के बाद वे आखिर क्या करना चाहते हैं? इस बात की आशंका बढ़ती जा रही है कि खुद राहुल गांधी इन सवालों के जवाब नहीं जानते हैं।'
कांग्रेस के युवा सांसद और कांग्रेस के ही कई नेताओं की नज़र में 2014 के आम चुनावों में प्रधानमंत्री पद के संभावित उम्मीदवार राहुल गांधी की बड़ी भूमिका को लेकर अटकलों का दौर तेज होता जा रहा है। कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह के बयान के आधार पर राहुल गांधी सितंबर, 2012 में ही किसी बड़ी भूमिका में दिखाई दे सकते हैं। मीडिया में ऐसी खबरें है कि मनमोहन सिंह की अगुवाई वाली कैबिनेट में जल्द ही फेरबदल हो सकता है। इस फेरबदल के बाद राहुल गांधी कैबिनेट में शामिल हो सकते हैं। वहीं, दूसरी तरफ यह अनुमान भी लगाया जा रहा है कि वे पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी बन सकते हैं, जिसके बाद कांग्रेस की मुख्यधारा की राजनीति में वे सीधे तौर पर दखल दे सकते हैं।
कांग्रेस को राहुल गांधी से ढेर सारी उम्मीदें हैं। पारदर्शिता (जानें मनमोहन और उनके मंत्रियों की संपत्ति का ब्यौरा) की वकालत करने वाले राहुल पर देश की सबसे अमीर सियासी पार्टी (पढ़ें, किस पार्टी के पास है कितनी दौलत) कांग्रेस को अगले लोकसभा चुनाव और उससे पहले कई राज्यों के विधानसभा चुनावों में सबसे ज्यादा वोट पाने वाली पार्टी बनाने का दारोमदार है। ऐसे समय में जब सोनिया गांधी खुद इलाज के सिलसिले में अमेरिकी यात्रा से लौटी हैं, राहुल गांधी के कंधों पर पार्टी को संकट के दौर से उबारने की बड़ी जिम्मेदारी है।
इस सबके बीच पत्रकार और जीवनीकार आरती रामचंद्रन ने राहुल गांधी की जीवनी ('डिकोडिंग राहुल गांधी') लिखी है। इसमें राहुल गांधी की निजी और सार्वजनिक ज़िंदगी से जुड़े कई पहलुओं (राहुल का नाम वेरोनिका के साथ जुड़ चुका है, पढ़ें) पर रोशनी डालने के साथ-साथ उनकी खामियों (बतौर एमपी राहुल का रिपोर्ट कार्ड पढ़ें) का भी विस्तृत ब्यौरा पेश किया गया है। 'द इकॉनमिस्ट' ने भी राहुल गांधी (क्या राहुल पर लगे रेप के आरोप के पीछे यूपी के सीएम हैं? पढ़ें) की कमियां गिनाने के लिए 'डिकोडिंग राहुल गांधी' का हवाला दिया है। हालांकि इस मशहूर पत्रिका की राय को कांग्रेस कोई तवज्जो नहीं दे रही है। पार्टी की ओर से दी गई प्रतिक्रिया में कहा गया, 'हम इकॉनमिस्ट और वॉशिंगटन पोस्ट क्या कहते हैं, इस पर टिप्पणी नहीं करते। जरूरत है कि हम ऐसी बौद्धिक दासता को त्याग दें।'
'द इकॉनमिस्ट' के मुताबिक राहुल की खामियों पर आगे की स्लाइड में नज़र डालें:
रिपोर्ट कार्ड: 'एमपी' राहुल गांधी फेल?
PHOTOS: राहुल गांधी ने बनाई नई गर्लफ्रेंड?
राहुल गांधी पर 'रेप' के आरोपों के पीछे अखिलेश यादव!
वेरोनिका के साथ जुड़ चुका है राहुल का नाम









