5000 साल पुरानी अमरनाथ गुफा का अनसुना 'राज'

नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर में स्थित बाबा अमरनाथ की गुफा तक की यह यात्रा हर साल आयोजित की जाती है। मानसरोवर यात्रा के समान ही इसका हिंदुओं में विशेष महत्व है। इस साल यह यात्रा 25 जून से शुरू होकर 2 अगस्त को खत्म होगी। वर्ष 1991 से 95 के दौरान आतंकी हमलों की आशंका के चलते इसे स्थगित कर दिया गया था।
अमरत्व के राज की साक्षी गुफा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस गुफा में भगवान शंकर ने माता पार्वती को अमरत्व और सृष्टि के सृजन के बारे में बताया था। दरअसल, पार्वती लगातार अपने पति से अमरत्व और सृष्टि के निर्माण का राज जानना चाहती थीं। लेकिन भगवान शंकर उस स्थान की तलाश में थे, जहां कोई तीसरा व्यक्ति सुन न सके। इसलिए उन्होंने इस गुफा को चुना।
सात मई से पंजीकरण
अमरनाथ यात्रा के लिए 7 मई से देशभर में पंजीकरण होगा। इसके लिए मेडिकल सर्टिफिकेट भी दरकार होगी। जम्मू कश्मीर की 121, यस बैंक की 49 और बिहार के चार सहकारिता बैंकों में भी अमरनाथ यात्रा का पंजीकरण हो सकेगा।
हेलिकॉप्टर सेवा सस्ती
हेलिकॉप्टर सेवा सस्ती की गई है। बालटाल-पंचतरनी-बालटाल के लिए एक साइड के 1445 रुपए और पहलगाम-पंचतरनी-पहलगाम 2355 रुपए में बुकिंग करवा सकते हैं। 2 से 12 वर्ष के बच्चों को आधा किराया लगेगा।
महत्वपूर्ण तथ्य
- 250 यात्री मारे गए थे वर्ष 1996 में अमरनाथ यात्रा के दौरान खराब मौसम के कारण। यह अमरनाथ यात्रा के इतिहास की सबसे बड़ी प्राकृतिक त्रासदी मानी जाती है।
- 5000 साल पुरानी है अमरनाथ गुफा। इसकी खोज एक गड़रिया बूटा मलिक ने की थी। हालांकि एक अन्य किंवदंती के अनुसार भृगु ऋषि ने सबसे पहले वहां शिवलिंगम के दर्शन किए थे।
- 3888 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है अमरनाथ गुफा। यह जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर से करीब 141 किलोमीटर दूर स्थित है।
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