छह कारण, जिनके चलते सचिन बनेंगे 'नेता'

नई दिल्ली. बॉलीवुड अभिनेत्री और राज्य सभा की पूर्व सदस्य हेमा मालिनी ने कहा है कि राज्य सभा रिटायर हो चुके लोगों की जगह है। उन्होंने कहा कि वे उम्मीद करती हैं कि सचिन इस नई जिम्मेदारी से ऊबेंगे नहीं। हेमा मालिनी ने कहा, 'यह बहुत ही सम्मान की बात है। उनके लिए मुझे बहुत खुशी है। यह (राज्यसभा सीट) रिटायर लोगों के लिए है। लेकिन सचिन अभी रिटायर नहीं हुए हैं।'
इससे पहले पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि सचिन तेंडुलकर सांसद की गरिमा को समझते होंगे। उन्होंने कहा कि अनिल कुंबले, राहुल द्रविड़, सौरव गांगुली बेहतर विकल्प साबित हो सकते थे। बकौल मांजरेकर, 'तेंदुलकर सबसे कम उपयुक्त व्यक्ति थे, पर हो सकता है कि वह हम सबको हैरान कर दें।'
क्रिकेट के मैदान पर शानदार पारी खेलने वाले तेंडुलकर का राज्यसभा के लिए मनोनयन को लेकर हर तरह की चर्चा जोरों पर है। आखिरकार खेल की दुनिया में बुलंदी छू चुके निर्विवाद छवि के सचिन को राज्यसभा के रास्ते राजनीति में आने की जरूरत क्यों पड़ी? इस सवाल को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। ऐसे में उन संभावित कारणों पर निगाहें डालना जरूरी है, जिनके चलते सचिन ने राजनीति में आने का फैसला किया हो सकता है। इन छह संभावित कारणों के चलते सचिन बनेंगे राज्यसभा सांसद:
1. क्रिकेट करियर के आखिरी पड़ाव पर राजनीति अच्छा विकल्प
दो दशकों से ज़्यादा समय से क्रिकेट खेल रहे सचिन का करियर अपने आखिरी पड़ाव पर है। वे किसी भी समय संन्यास का ऐलान कर सकते हैं। ऐसे में राजनीति में सक्रिय होकर वे न सिर्फ अपने प्रशंसकों से सीधे तौर जुड़े रह सकते हैं बल्कि खुद को सार्वजनिक जीवन में प्रासंगिक बनाए रख सकते हैं।
2. भारत रत्न के लिए दावा और मजबूत करने की गुंजाइश
सचिन तेंडुलकर को भारत रत्न दिए जाने की मांग लंबे समय से चल रही है। लेकिन हॉकी में ध्यानचंद, एथलेटिक्स में मिल्खा सिंह व पीटी ऊषा, बैडमिंटन में प्रकाश पादुकोण के योगदानों को किसी से भी कम करके नहीं आंका जा सकता है। हॉकी के जादूगर कहे जाने वाले ध्यानचंद को सचिन से पहले भारत रत्न जैसा सम्मान दिए जाने की मांग ने भी हाल के कुछ महीनों में तेजी पकड़ी है। ऐसे में राज्यसभा सांसद बनकर सार्वजनिक महत्व के विषयों को उठाने और नीतियां बनाने में सक्रिय योगदान के जरिए सचिन 'भारत रत्न' की होड़ में अपने अन्य 'प्रतिद्वंद्वियों' से आगे निकल सकते हैं।
3. क्रिकेट समेत देश के अन्य खेलों के लिए असरदार आवाज़ उठाने का मौका
भारत में क्रिकेट के आगे अन्य खेलों की चमक फीकी पड़ गई है। ऐसे में कई लोगों को लगता है कि सचिन ने राज्यसभा का सदस्य बनने का प्रस्ताव मंजूर कर न सिर्फ क्रिकेट से जुड़े मुद्दों को संसद में उठाने का रास्ता साफ किया है बल्कि वे अन्य खेलों का भी 'उद्धार' कर सकते हैं।
4. क्रिकेट के मैदान के अलावा देश की सेवा के लिए संसद प्रभावी मंच
सचिन क्रिकेट के जरिए देश की सेवा की बात अक्सर कहते हैं। वे देश के प्रति अपने समर्पण को अलग-अलग तरीके से साबित करते रहे हैं। लेकिन क्रिकेट करियर के बाद सचिन को शायद ऐसे मंच की तलाश है, जहां वे असरदार ढंग से देश के ज्वलंत मुद्दों पर न सिर्फ अपनी बात रख सकें बल्कि नीति निर्माण में भी सक्रिय योगदान दे सकें। संसद एक ऐसा ही मंच है, जहां उनकी ऐसी हसरतें पूरी हो सकती हैं।
5. सत्ता और उसे चलाने वालों के नजदीक रहने का अवसर
सचिन के कुछ आलोचकों का कहना है कि राज्यसभा का सदस्य बनने पर हामी भरने के पीछे सचिन की क्रिकेट के मैदान से हटने के बाद भी सत्ता और उसे चलाने वालों के नजदीक रहने की मंशा भी हो सकती है। गौरतलब है कि ऐसा अक्सर देखा जाता है क्रिकेट या अन्य किसी भी खेल या फिल्मों से सक्रियता घटने के बाद नामी गिरामी सितारों की चमक फीकी पड़ जाती है। हालांकि, सचिन का विराट व्यक्तित्व किसी भी मंच का मोहताज नहीं है। लेकिन फिर भी देश की सत्ता के सर्वोच्च प्रतीक संसद का सदस्य होना किसी के लिए भी 'सम्मान' और 'ताकत' पाने का शायद सबसे असरदार तरीका हो सकता है। और सचिन के आलोचकों का कहना है कि कांग्रेस जैसी किसी एक विशेष पार्टी की पहल पर राज्यसभा सांसद बनने का प्रस्ताव मंजूर करने वाले तेंडुलकर इसके अपवाद नहीं हैं।
6. सचिन का इस्तेमाल?
कुछ लोगों का यह भी मानना है कि सचिन तेंडुलकर को राज्यसभा सांसद का बनने का प्रस्ताव पेशकर उनका 'इस्तेमाल' करने की कोशिश की गई है। गौरतलब है कि क्रिकेट की दुनिया में 'भगवान' कहे जाने वाले सचिन को समाज का तकरीबन हर तबका पसंद करता है। शिवसेना जैसी पार्टियों ने आरोप लगाया है कि कांग्रेस ने सचिन की लोकप्रियता को अपने हक में भुनाने की कोशिश की है।
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क्या आप मांजकरेकर के बयान से सहमत हैं? 6 कारणों में से आपको सचिन के राजनीति में आने की सबसे सटीक वजह कौन सी लगती है? क्या सचिन को राजनीति में आना चाहिए? इन मुद्दों पर अपनी संतुलित राय जाहिर करें।
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