फेसबुक विवाद के बाद आईटी एक्ट में बदलाव की तैयारी
सुप्रीम कोर्ट आईटी एक्ट में बदलाव संबंधी याचिका पर विचार को तैयार हो गया है। शीर्ष कोर्ट ने गुरुवार को सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर हाल में टिप्पणियों को लेकर हुई गिरफ्तारियों पर चिंता जताई। साथ ही मामले में अटार्नी जनरल जीई वाहनवती की मदद मांगी।
चीफ जस्टिस अल्तमस कबीर की अध्यक्षता वाली बेंच शुक्रवार को वाहनवती की राय जानेगी। अदालत ने ऐसे मामलों के लंबित रहने तक सरकारी अधिकारियों को प्रतिरोधक कार्रवाई करने से रोकने का आग्रह ठुकरा दिया।
कोर्ट ने कहा कि हाल में लोगों की गिरफ्तारी की घटनाओं पर वह स्वत: संज्ञान लेने पर विचार कर रही है। बेंच ने अचरज भी जताया कि अभी तक किसी ने भी आईटी एक्ट की संबंधित धारा को चुनौती क्यों नहीं दी? दिल्ली की छात्रा श्रेया सिंघल ने यह जनहित याचिका दाखिल की है। इसमें उन्होंने कहा है कि आईटी एक्ट 2000 की धारा 66 ए की शब्दावली व्यापक और अस्पष्ट है। इसके दुरुपयोग की संभावनाएं हैं। यह संविधान के अनुच्छेद 14, 19 (1)(ए) और अनुच्छेद 21 के भी प्रतिकूल है।
सिब्बल मिले सिविल सोसाइटी सदस्यों से : संचार मंत्री कपिल सिब्बल ने गुरुवार को सिविल सोसाइटी के सदस्यों से आईटी एक्ट के प्रावधानों को लेकर चर्चा की। सरकार का कहना है कि कानून में खामियां नहीं हैं। बल्कि उसकी गलत व्याख्या के कारण समस्याएं पैदा हुई हैं।
'आईटी एक्ट से संबंधित नई गाइडलाइन जारी करने की मंशा अच्छी है। लेकिन इससे मकसद पूरा नहीं होगा। यह कुछ ऐसा ही है कि बरसात में टपकती छत को पट्टी से लीक होने से रोका जाए। संसद के जरिए संशोधन से ही असल मकसद पूरा होगा।'
-पवन दुग्गल, साइबर विशेषज्ञ
आईटी एक्ट की धारा 66ए में कोई भी मामला दर्ज करने से पहले एसएसपी या आईजी (ज्वाइंट कमिश्नर) स्तर के पुलिस अधिकारियों से मंजूरी लेना अब जरूरी होगा। केंद्रीय दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने गुरुवार को मंत्रालय के अधिकारियों के अलावा विभिन्न जन संगठनों, इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियों और केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों के बैठक में इस फैसले की जानकारी दी। बैठक में विभिन्न सोशल साइटों पर पोस्ट किए गए आपत्तिजनक टिप्पणियों को हटाने के संभावित नियमों पर भी चर्चा की गई।
हाल में शिवसेना सुप्रीमो बाल ठाकरे की मृत्यु के बाद मुंबई के हालात पर कमेंट करने वाली दो लड़कियों की गिरफ्तारी के बाद सिब्बल ने आईटी एक्ट में संशोधन का इरादा व्यक्त किया था।
सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय दूरसंचार एवं सूचना तकनीक मंत्रालय एक-दो दिन में सभी राज्य सरकारों को एक सर्कुलर प्रेषित करेगा। इसमें सलाह दी गई है कि अगर किसी थाने की पुलिस आईटी एक्ट की धारा 66ए में कोई मामला दर्ज कर रही है तो एसएसपी स्तर के पुलिस अधिकारी की मंजूरी जरूरी होगी। अगर मामला बड़े शहरों का है तो वहां पर ज्वाइंट कमिश्नर पुलिस या इंस्पेक्टर जनरल ऑफ पुलिस स्तर के अधिकारी से मंजूरी लेनी होगी। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने भी इस पर अपनी सहमति दर्ज कराई।
बैठक के दौरान इस बात पर भी बहस हुई कि अगर किसी सोशल साइट पर कुछ पोस्ट किया गया है और उस पर आपत्ति है तथा उसे हटाने के लि क्या किया जाए। इस मामले में कोई आम सहमति तो नहीं बनी लेकिन यह तय किया गया कि ऐसे मामले में सोशल साइट के प्रतिनिधि पहले संबंधित व्यक्ति से बात करें और उसके बाद उसके पोस्ट हटाएं। हालांकि ऐसे मामले, जिनमें पुलिस या कानूनी संस्थाओं का यह कहना हो कि सोशल साइट पर एकाउंट खोलने वाले व्यक्ति से इजाजत लेने की जरूरत नहीं है उन मामलों में सोशल साइट को यह त्वरित आधार पर हटाना होगा। एक अधिकारी ने कहा कि जन संगठनों की ओर से उन सोशल साइट एकाउंट को लेकर मंत्रालय के साथ मतभेद जाहिर हुआ जिसमें कोई अपनी पहचान छुपाकर छदम नाम से साइट पर है। जनसंगठनों का कहना था कि अगर कोई व्यक्ति गोपनीयता चाहता है तो उसे खिलाफ कार्रवाई न हो। लेकिन मंत्रालय का कहना था कि अगर नियमों का उल्लंघन होता है तो ऐसे मामले में कार्रवाई को लेकर आपत्ति नहीं होनी चाहिए।
आईजी या एसएसपी की मंजूरी पर ही दर्ज होगा मामला








