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गुरु के चेहरे पर नहीं था कोई अफसोस, आखिरी 12 घंटों का ब्‍यौरा पढ़ें

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अजमल आमिर कसाब के बाद अब अफजल गुरु को भी फांसी दे दी गई है। फांसी के वक्‍त मौजूद अफसरों में से एक के मुताबिक अंतिम वक्‍त में अफजल के चेहरे पर कोई अफसोस नहीं दिखाई दे रहा था। वह आखिरी पलों तक पूरी तरह शांत और गंभीर बना हुआ था। हां, शुक्रवार शाम जब उसे फांसी दिए जाने की जानकारी दी गई थी तब वह थोड़ा विचलित जरूर हुआ था। 
 
अफजल को फांसी होगी, यह 3 फरवरी को ही तय हो गया था। 3 फरवरी को राष्‍ट्रपति के यहां से अफजल की दया याचिका खारिज होने की लिखित सूचना गृह मंत्रालय के पास आ गई थी। इसके बाद गृह मंत्रालय तत्‍काल सक्रिय हुआ। चार फरवरी को गृह मंत्री ने फाइल पर दस्‍तखत कर मामला आगे बढ़ा दिया और केवल पांच दिन बाद अफजल को फांसी पर लटका दिया गया।
 
राष्‍ट्रपति के रहम नहीं दिखाने के तत्‍काल बाद गृह मंत्रालय ने दिल्‍ली सरकार को इसकी सूचना दी। अफजल तिहाड़ जेल में बंद था और यह दिल्‍ली में है। लिहाजा दिल्‍ली सरकार को सूचना देना जरूरी था। तिहाड़ जेल में सिर्फ महानिदेशक (डीजी) विमला मेहरा को ही इसकी खबर थी। पूरे मिशन को एकदम गुप्‍त रखा गया था। 9 फरवरी को अफजल को फांसी होगी, इसकी जानकारी तिहाड़ जेल नंबर 3 के अफसरों के अलावा किसी को नहीं दी गई। अफजल को जेल नंबर 3 में ही फांसी पर लटकाया गया।
 
शुक्रवार (8 फरवरी) की शाम को ही अफजल को फांसी के बारे में बता दिया गया था और उसकी अंतिम इच्‍छा भी पूछ ली गई थी। उसने अंतिम इच्‍छा के रूप में 'कुरान' की एक प्रति मांगी थी। उसके पास इसकी एक प्रति पहले से थी, लेकिन अंतिम इच्‍छा के तौर पर भी उसने यही मांग की। उसे यह मुहैया करा दी गई थी।
 
रात में उसके सेल में खाने-पीने की कई चीजें भी रखी गई थीं। लेकिन उसने कुछ नहीं खाया। रात भर में उसने दो-तीन गिलास पानी पीया। रात भर वह सो नहीं सका। सुबह अफसरों ने जब संतरी से पूछा कि क्‍या अफजल जग गया है, तो उसका कहना था कि वह रात भर सोया ही नहीं।
 
शनिवार सुबह 6 बजे जेल डीआईजी, जेल सुपरिटेंडेंट, डिप्‍टी सुपरिटेंडेंट, मजिस्‍ट्रेट और डॉक्‍टर जेल नंबर 3 पहुंचे। संतरी से पूछा गया कि क्‍या वह जग गया तो बताया कि वह सोया ही नहीं था। डॉक्‍टरों ने उसका टेस्‍ट किया। सब ठीक पाया गया। उसे 7.30 बजे फांसी के लिए ले जाया गया। उसे डेथ वारंट पढ़ कर सुनाया गया।  
 
अंतिम समय में अफजल बिना कॉलर का कुर्ता पहने हुए था। फांसी देते समय जेल नंबर 3 में अफजल गुरु के अलावा सिर्फ 6 लोग मौजूद थे। इनमें जल्लाद, मजिस्ट्रेट, डॉक्टर और जेल के तीन अधिकारी शामिल थे। फांसी से पहले जेल अधिकारियों ने अफजल के शरीर के वजन के बराबर भार से फांसी का डेमो करवाया था। फांसी से पहले जल्लाद ने अफजल गुरु के पैरों को हाथ लगाया और कहा कि वह अफजल को नहीं मार रहा है, बल्कि वह भारत के संविधान का पालन कर रहा है। इसके बाद मजिस्ट्रेट ने आदेश दिया और जल्लाद ने 'लिवर' दबा दिया। शनिवार सुबह 8 बजे अफजल को डॉक्‍टरों ने मृत घोषित कर दिया। इसके करीब 15 मिनट बाद सरकार की ओर से इसकी पुष्टि की गई। इससे पहले 21 नवंबर, 2012 को मुंबई हमले के दोषी आतंकी अजमल आमिर कसाब को फांसी दी गई थी।
 
 
 

 

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