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अफजल के लिए पाकिस्‍तान में 'राष्‍ट्रीय शोक'

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नई दिल्ली। पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन देश में गतिविधियों को तेजी देने की फिराक में हैं। भारतीय खुफिया एजेंसियों, मिलिट्री इंटेलीजेंस ब्यूरो, रॉ, मल्टी एजेंसी सेंटर (मैक) और आईबी ने घाटी में इस्लामाबाद, कराची, पेशावर और मुजफ्फराबाद से आने वाले फोन कॉल्स को इंटरसेप्ट कर यह जानकारी हासिल की है। 
 
 
अफजल गुरु की फांसी के बाद भारत में ज्यादातर जगहों पर जश्न मनाया जा रहा है। लेकिन पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) और पाकिस्तान में इस खबर से लोगों को 'सांप सूंघा' हुआ है। पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में इस घटना के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं और लोग दुखी हैं। बताया जा रहा है कि पीओके में लोग यह मान रहे हैं कि अफजल गुरु की फांसी के बाद कश्मीर की कथित आजादी के लिए संघर्ष और तेज होगा। पाकिस्तान के इशारे पर काम करने वाली पीओके की 'कठपुतली' सरकार ने अफजल गुरु की मौत पर तीन दिनों का राजकीय शोक घोषित किया है। इस दौरान सभी सरकारी इमारतों पर पाकिस्तान और पीओके सरकार का झंडा आधा झुका हुआ है।   
 
अफजल गुरु की फांसी से पाकिस्तान की राजनीति में भी हलचल मची हुई है। पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सदस्य और सेनेट कमिटी ऑन डिफेंस के अध्यक्ष मुशाहिद हुसैन सैयद ने अफजल गुरु को बेकसूर बताते हुए इसे न्यायिक मौत करार दिया है। मीडिया से मुखातिब सत्ताधारी पाकिस्तान पीपल्स पार्टी की सहयोगी पार्टी पीएमएल (क़ैद) के नेता मुशाहिद हुसैन ने अफजल की फांसी पर प्रतिक्रिया देते हुए सुप्रीम कोर्ट के 5 अगस्त, 2005 के फैसले का हवाला दिया। मुशाहिद हुसैन ने कहा, 'भारत के सुप्रीम कोर्ट ने भी अफजल गुरु पर अपने फैसले में साफ किया था कि अदालत अफजल को फांसी की सजा इसलिए सुना रही है क्योंकि देश का मानस तभी संतुष्ट होगा जब दोषी को सजा-ए-मौत मिले।' 
 
मुशाहिद ने भारत पर तंज कसते हुए कहा, 'अफजल गुरु जैसे बेगुनाह को फांसी देने और उसे अपने परिवार से न मिलने देने की अमानवीय हरकत की आलोचना भारत में अरुंधति रॉय जैसे बुद्धिजीवी कर रहे हैं।' इस मौके पर मुशाहिद भारत के अंदरूनी मामले में भी दखल देने से बाज नहीं आए। मुशाहिद हुसैन ने कश्मीर में अलगाववादी नेता यासीन मलिक की भूख हड़ताल को पूरा समर्थन देने का ऐलान किया। मुशाहिद ने कहा कि एक बेगुनाह को फांसी पर लटकाए जाने से न सिर्फ कश्मीरी बल्कि पाकिस्तानी अवाम में भी गुस्सा है। 
 
पीओके के शहर मुजफ्फराबाद में अफजल गुरु की मौत पर पसरे मातम के बीच कश्मीर की कथित आज़ादी की मांगें भी सुनाई पड़ रही हैं। जम्मू कश्मीर नेशनल स्टूडेंट्स फेडरेशन (एनएसएफ) ने कश्मीर में आतंकी गतिविधियों में शामिल रहे मकबूल भट की 29 वीं पुण्यतिथि से एक दिन पहले यानी रविवार को मोटरसाइकिल रैली निकाली। मकबूल भट अलगाववादी नेता था जिसने जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट नाम का आतंकी संगठन बनाया था। भट को 11 फरवरी, 1984 को तिहाड़ में फांसी दी गई थी।भट पर आरोप था कि उसने एक भारतीय खुफिया अफसर की हत्या की थी। भट के समर्थन में निकली रैली में एनएसएफ के कार्यकर्ता हाथों में पार्टी का लाल झंडा लिए हुए थे और वे ' मकबूल भट जिंदाबाद' और 'भट तुम्हारे अनगिनत समर्थक' जैसे नारे लगा रहे थे। यह रैली एनएसएफ लीडर गुल नवाज बट की कब्र से शुरू होकर चत्तर में एनएसएफ के पू्र्व नेता लियाकत अवान की कब्र पर खत्म हुई। गुल नवाज की मौत 2005 के भूकंप में हुई थी। जबकि लियाकत 1990 में सीमा पार करने की कोशिश में मारा गया था। रैली में शामिल कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए एनएसएफ के सेंट्रल सेक्रेटरी जनरल कामरान बेग ने कहा, 'मकबूल भट के सिद्धांत कश्मीरी राष्ट्र की सभी समस्याओं के लागू किए जाने वाले हल देते हैं। मकबूल उन लोगों के नेता थे, जो किसी भी कीमत पर कश्मीर की आजादी से समझौता नहीं करना चाहते थे।' गौरतलब है कि एनएसएफ एक कट्टरपंथी संगठन है जो जम्मू कश्मीर की आजादी की वकालत करता है। 
 
आगे पढ़ें- परिजनों को सौंपा जा सकता है अफजल गुरु का सामान
 
 

 

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