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18 साल से कम उम्र के बच्चों की इन चिंताओं पर ध्यान क्यों नहीं?

dainikbhaskar.com | Mar 15, 2013, 17:27PM IST
 
 

देश में लगभग 45 करोड़ से ज्यादा बच्चे 18 साल से कम उम्र के हैं। देशभर के सांसदों, विशेषज्ञों का कहना है कि सहमति से यौन संबंध बनाने की उम्र घटाने से ज्यादा जरूरी है इन्हें सही तरीके से जीने का अधिकार देना। लेकिन इस ओर सरकार का ध्यान ही नहीं है... 
 
 
जल्दी शादी हो रही है 
 
1 करोड़ से ज्यादा की कम उम्र में शादी हो जाती है।10 लाख से ज्यादा बच्चियां हर साल मां बन जाती हैं। 
 
मजदूरी कर रहे हैं 
 
50 लाख से ज्यादा बच्चे मजदूरी कर रहे हैं। इनमें भी 20 लाख बच्चे खतरनाक श्रेणी के कामों में लगे हैं। 
 
यौन शिक्षा नहीं दे रहे हैं 
 
72फीसदी को यौन शिक्षा नहीं मिलती। इससे एड्स, टीन एज प्रेगनेंसी और बच्चियों के अबॉर्शन की घटनाएं बढ़ेंगी। 
 
खाना नहीं मिल रहा है 
 
1.1 करोड़ बच्चियों का वजन औसत से कम। गरीबी की वजह से पोषक आहार न मिलने से सवा करोड़ लड़कियां और 60 लाख लड़कों में खून की कमी। 
 
नशे की गिरफ्त में हैं 
 
हर पांच में से एक बच्चा नशे की गिरफ्त में। कई बच्चे 13 से 15 सिगरेट रोज पी रहे हैं। 15' बच्चे शराब तक पी रहे हैं। 
 
फैसले लेने की प्रक्रिया में शामिल नहीं कर रहे हैं 
 
60' लड़कियों और 35 प्रतिशत लड़कों को फैसले लेने में शामिल नहीं किया जाता। ऐसे में उन्हें अपने लिए फैसले लेने के लिए कैसे छोड़ा जा सकता है? 
 
अपराधी बन रहे हैं 
 
2011 में इस उम्र के 21,657 बच्चे किसी न किसी अपराध में शामिल रहे। गरीबी बड़ा कारण। 
 
पढ़ नहीं पा रहे हैं 
 
2.4 करोड़ बच्चों के नाम स्कूलों में दर्ज नहीं हैं। जिनके नाम दर्ज हैं उनमें भी 64 प्रतिशत स्कूलों में कभी-कभार ही जाते हैं। 
 
अपना घर छोड़ रहे हैं
 
40 लाख से ज्यादा बच्चे हर साल रोजी-रोटी के लिए घर छोड़ देते हैं। 10 से 15 लाख बच्चे अन्य वजहों से घर छोडऩे को मजबूर हैं। 
 

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