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सेना प्रमुख आयु विवाद: देखो और इंतजार करो के मूड में एंटनी

 
Source: हेमंत अत्री   |   Last Updated 10:28(17/01/12)
 
 
 
 
नई दिल्ली। देश के सैन्य इतिहास में पहली बार आयु विवाद को लेकर अपने ही मंत्रालय के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने वाले थल सेना प्रमुख जनरल विजय कुमार सिंह के खिलाफ केंद्र सरकार फिलहाल किसी तरह की कार्रवाई की तैयारी में नहीं दिखती है। सरकार फिलहाल इस मामले में देखो और इंतजार करो की नीति अपनाने की योजना पर काम कर रही है।

साउथ ब्लाक के शीर्ष पदस्थ सूत्रों के मुताबिक, रक्षा मंत्री एके एंटनी ताजा घटनाक्रम से दुखी अवश्य हैं लेकिन नाराज या गुस्से में नहीं हैं। इसी के चलते सेना प्रमुख के कोर्ट में जाने की खबर मिलने के बावजूद एंटनी कामकाज निपटाने के बाद रोजाना की भांति शाम को ही कृष्णा मेनन मार्ग स्थित अपने निवास पर चले गए। आयु विवाद पर उनकी दो सप्ताह पहले ही प्रधानमंत्री से अलग से लंबी बातचीत हो चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट में याचिका स्वीकार हो जाने की स्थिति में फिलहाल उनकी योजना आयु विवाद को लेकर सरकार का पक्ष कोर्ट में रखने की है। संकेत मिले हैं कि इस मामले में सरकार अपना फैसला सुप्रीम कोर्ट का रुख भांपने के बाद ही तय करेगी। सरकार इसलिए भी फूंक-फूंक कर कदम उठाना चाहती है क्योंकि यह मामला उत्तराखंड, पंजाब और उत्तर प्रदेश में चुनाव का मुद्दा भी बन सकता है, जहां सैनिक और पूर्व सैनिक मतदाताओं की अच्छी संख्या है।

गड़बड़ा सकती है उत्तराधिकार की योजना

आयु विवाद के सुप्रीम कोर्ट पहुंचने के ताजा घटनाक्रम के बाद सेना में जनरल वीके सिंह के उत्तराधिकार की सारी योजना गड़बड़ा सकती है। यदि सुप्रीम कोर्ट जनरल सिंह की याचिका को स्वीकार कर उनकी जन्म तिथि 10 मई 1951 मान लेता है तो उन्हें 10 माह का अतिरिक्त कार्यकाल मिल जाएगा। ऐसे में उनकी सेवानिवृत्ति के समय उत्तरी कमान प्रमुख केटी पार्णिक नए सेना प्रमुख होंगे।

यदि जनरल सिंह किसी कारण से 31 मई 1950 जन्म तिथि के आधार पर 31 मई को ही रिटायर होते हैं तो पूर्वी कमान प्रमुख ले. जन विक्रम सिंह का नया सेना प्रमुख बनना तय है। यदि किसी कारण से जनरल वीके सिंह अपने नए उत्तराधिकारी के चयन से पहले (परंपरा के मुताबिक, सेवानिवृत्ति से दो माह पहले यानी 31 मार्च तक) इस्तीफा देने का फैसला करते हैं तो उस स्थिति में पश्चिमी कमान प्रमुख ले. जनरल एसआर घोष भी इस प्रतिष्ठित पद की दौड़ में शामिल हो जाएंगे।

हालांकि वे भी जनरल वीके सिंह के साथ 31 मई को ही रिटायर होने वाले हैं लेकिन मौजूदा सेना प्रमुख के समय से पहले इस्तीफे की सूरत में वे न केवल वरिष्ठतम सैन्य कमांडर बन जाएंगे बल्कि सेना प्रमुख नामित होकर उन्हें 62 साल की आयु होने तक दो साल का कार्यकाल भी मिल जाएगा। हालांकि केंद्र सरकार के पास पसंदीदा अधिकारी को नया सेना प्रमुख बनाने का विशेषाधिकार है।

फिर भी साथ दिखेंगे एंटनी और वीके

अपने मंत्रालय के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देकर देश के पहले सेवारत सेना प्रमुख बने जनरल सिंह के खिलाफ यदि सरकार कोई आक्रामक कार्रवाई नहीं करती है तो रक्षा मंत्री एंटनी के साथ 22 जनवरी को एनसीसी कैडेटों की परेड के निरीक्षण कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। यही नहीं, 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर भी रक्षा मंत्री व सेना प्रमुख की एक साथ मौजूदगी निश्चित है। ये दोनों ऐसे पहले सार्वजनिक समारोह होंगे जब कानूनी संघर्ष में फंसे होने के बावजूद सेना प्रमुख व रक्षा मंत्री सार्वजनिक रूप से साथ-साथ दिख सकते हैं।

विवाद पर सैन्य विशेषज्ञों की राय जुदा-जुदा

आयु विवाद को लेकर थल सेना प्रमुख जनरल विक्रम सिंह के सुप्रीम कोर्ट की शरण में जाने से उपजे घटनाक्रम को लेकर सैन्य विशेषज्ञों में भी एका नहीं है। सभी ने घटनाक्रम को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है लेकिन कोर्ट जाने के विकल्प को लेकर उनकी राय अलग-अलग है। उधर, भाजपा ने मामले का सारा ठीकरा यूपीए सरकार पर फोड़ते हुए कहा है कि वह मामले को सही ढंग से निपटाने में पूरी तरह नाकाम रही है।

सैन्य विशेषज्ञ मारूफ रजा ने इसे ऐतिहासिक क्षण करार देते हुए कहा कि मौजूदा मामला सियासतदां-नौकरशाहों के गठजोड़ की सालों से जारी उस जुगलबंदी का परिणाम है जिसके जरिए वे सशस्त्र सेनाओं को दबाते रहने की मनोदशा से ग्रस्त रहे हैं।

उन्होंने कहा कि एक ओर सरकार के शीर्ष लोग सेना प्रमुख में विश्वास जता रहे हैं वहीं यही लोग उनकी ओर से पेश जायज व कानूनसम्मत कागजात पर आधारित दलीलें मानने को तैयार नहीं हैं। किसी सैनिक के लिए उसके आत्मसम्मान से बड़ी कोई चीज नहीं है और वीके सिंह ने कोर्ट जाकर सही फैसला किया है।

थल सेना के सेवानिवृत्त डिप्टी चीफ ले. जनरल राज कादियान मानते हैं कि निश्चित तौर पर वीके सिंह के पास एक नागरिक के रूप में अपना पक्ष सही साबित करने के लिए कोर्ट जाने का मौलिक अधिकार सुरक्षित है लेकिन उन्हें बतौर सेना प्रमुख ऐसा करने से बचना चाहिए।

कादियान ने कहा कि सेवारत सेना प्रमुख के कोर्ट में जाने को वे सही नहीं मानते और यदि जनरल सिंह को निजी सम्मान की रक्षा के लिए कोर्ट में जाना ही थी तो पहले इस्तीफा देकर इस विकल्प का प्रयोग करना चाहिए था। उन्होंने कहा कि मौजूदा घटनाक्रम अनापेक्षित नहीं है लेकिन इससे सेना की छवि अवश्य प्रभावित होगी।
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
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