प्रवचन करने वाले और लाखों अनुयायी होने का दावा करने वाले आसाराम बापू एक बार फिर विवादों में हैं। इस बार भक्त के सिर पर लात मारने का मामला है। दिल्ली गैंगरेप की शिकार दामिनी को ही दोषी ठहराने या आलोचकों की तुलना कुत्ते से करने वाले आसाराम बापू अक्सर विवादों में रहे हैं। (...‘और आसाराम के गुंडे मुझ पर मौत बनकर टूट पड़े थे’)
विभाजन के समय आसाराम का परिवार पाकिस्तान से गुजरात आ गया था। 1941 में पाकिस्तान के सिंध प्रांत में पैदा हुए आसाराम हरपालानी के पिता कोयला और लकड़ी बेचते थे। लेकिन आसाराम बापू आज लाखों लोगों के पूजनीय बन गए हैं। इस सफर की शुरुआत करीब 42 साल पहले हुई। तब गुजरात में आसाराम हरपालानी को करीब 10 एकड़ उपजाऊ जमीन मिली और इसी जमीन पर उन्होंने अपना पहला आश्रम बनाया। जल्द ही उन्होंने अपना सरनेम हरपालानी की जगह बापू कर लिया। आज उनके दुनिया भर में 400 से ज्यादा आश्रम और लाखों भक्त हैं।
आसाराम के केंद्रीय मीडिया प्रभारी डॉ. सुनील वानखेड़े का कहना है कि आज बापू जो भी हैं किसी राजनेता की मेहरबानी से नहीं बल्कि ईश्वर की कृपा से हैं। ईश्वर की कृपा से ही पिछले साल गुजरात में हेलीकॉप्टर के दुर्घटनाग्रस्त होने पर उन्हें खरोंच तक नहीं आई। उन्होंने आसाराम और उनके ट्रस्ट को लेकर किसी भी अदालत में कोई केस लंबित होने से इंकार किया। डॉ. वानेखेड़े का कहना है कि आसाराम या उनके ट्रस्ट ने कोई जमीन नहीं हड़पी है। कई जगहों पर उन्हें श्रद्धालुओं ने जमीन दान में दी है तो कई जगहों पर उन्होंने जमीन खरीदी है। गुजरात में साबरमती के किनारे सत्संग होने पर वह अपना टेंट लगा लेते हैं और सत्संग खत्म होने के बाद उसे हटा लेते हैं। उनका कहना था कि जनहित के कामों के लिए कुछ देर के लिए वह टेंट लगाते हैं और उनके विरोधी इसे जमीन पर कब्जा बता कर दुष्प्रचार करते हैं। उन्होंने टॉफी फेंकने की मशीन से किसी की आंख फूटने के आरोप को भी गलत बताया और कहा कि वह आदमी बापू से पैसे ऐंठने की फिराक में था। उसने मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराया था जो नाकाम रहा था।
आसाराम के प्रवक्ता ने सूरत की जमीन सरकार को वापस करने की बात भी कही। उनका कहना था कि राजोकरी में वे झुग्गियों में रहने वाले बच्चों को पढ़ाते हैं। उन्होंने बिजली चोरी की बात को भी गलत बताया। डॉ. वानखेड़े ने कहा कि गुजरात के आश्रम से बच्चों के गुम होने पर आश्रम के भक्तों ने बच्चों को ढूंढने में परिजनों की मदद की थी। डॉ. वानखेड़े ने कहा कि अमृत प्रजापति आश्रम में गलत कामों में लिप्त था इसलिए उसे नौकरी से निकाल दिया गया। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक राहुल की मौत हार्ट अटैक से हुई थी और वह आश्रम से किसी तरह से जुड़ा नहीं था।