जंग के बाद 'तवायफ' की खूबसूरती का लुत्फ उठा रही थी भुट्टो!
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| May 16, 2012, 07:03AM IST

वर्ष 1971 में शिमला में तैनात भारतीय नौकरशाह एम.के. कॉ को बेनजीर की देखभाल की जिम्मेदारी सौंपी गई थी और कॉ ने इस घटना का जिक्र हालिया जारी अपनी पुस्तक 'एन आउटसाइडर एवरीह्वेयर' में किया है। कॉ को इस जिम्मेदारी में मदद भारतीय विदेश सेवा की महिला अधिकारी वीणा दत्ता ने की। कॉ ने अपनी पुस्तक में कहा है, "बेनजीर का मिजाज खुशनुमा रखने में वीणा ने मेरी मदद की।"
कॉ के मुताबिक 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध और बांग्लादेश के जन्म के बाद प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ एक शांति समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए जुल्फिकार 1972 में शिमला आए थे। उनके साथ उनकी पुत्री बेनजीर भुट्टो भी थीं। कॉ का कहना है कि बेनजीर कमाल अमरोही द्वारा बनाई गई मशहूर फिल्म 'पाकीजा' देखना चाहती थीं। इस फिल्म में अभिनेत्री मीना कुमार ने एक तवायफ की भूमिका निभाई थी और इस यादगार भूमिका को निभाने के कुछ ही समय बाद उनका निधन हो गया।
कॉ के मुताबिक बेनजीर द्वारा फिल्म देखने की इच्छा जताने पर उन्होंने शिमला के उपायुक्त से बात की और रिट्ज सिनेमा में एक विशेष शो का आयोजन किया गया। कॉ ने कहा, "फिल्म देखने के लिए उस समय सिनेमा हॉल में केवल तीन लोग-बेनजीर, वीणा और मैं स्वयं था। बेनजीर को यह फिल्म काफी पसंद आई। मेरे जेहन में युवती एवं भोली-भाली बेनजीर की तस्वीर उनकी हत्या तक ताजा रही।" उल्लेखनीय है कि भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी कॉ 42 वर्षो की सेवा के बाद वर्ष 2001 में सेवानिवृत्त हुए।





