नई दिल्ली। मनमोहन सरकार ने कैबिनेट में
भारी फेरबदल किया है। इस बदलाव की चर्चा पिछले कुछ दिनों से सत्ता के गलियारों में चल रही थी। इन चर्चाओं में प्रमुखता से यही बात उभर रही थी कि बदलाव में राहुल गांधी की भूमिका सबसे अहम होगी।
माना जा रहा था कि आने वाले लोकसभा चुनाव से पहले इन बदलावों के जरिए कांग्रेस पार्टी पूरे देश में राहुल गांधी को अपने नेता के तौर पर पेश करेगी। लेकिन कैबिनेट में हुए बदलावों से यह जाहिर नहीं होता है। कैबिनेट बदलाव में अकेले राहुल की भूमिका सबसे अहम नहीं दिख रही है। ऐसा लग रहा है कि इन बदलावों में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी की बराबर-बराबर की भूमिका रही है। (
पढ़ें : खुर्शीद बने विदेश मंत्री, बंसल को मिली रेल) लेकिन मोटे तौर पर इन बदलावों में राहुल गांधी का असर साफ महसूस किया जा सकता है।
उन्होंने अपने युवा साथियों का कद बढ़वाया है। इनमें सचिन पायलट, ज्योतिरादित्य सिंधिया, मनीष तिवारी और पल्लम राजू जैसे नेता शामिल हैं। यह एक अच्छा संकेत है। इससे यह संदेश निश्चित तौर पर जाएगा कि राहुल की टीम तैयार हो रही है। युवा चेहरों को काम करने का मौका मिलेगा तो इससे पार्टी को अपनी छवि सुधारने का मौका भी मिलेगा। लेकिन इन बदलावों में राहुल अपनी टीम के कुछ और साथियों को शामिल करते तो यह बेहतर कदम होता।
लेखिका वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक हैं।