कौन हैं कैबिनेट के नए दावेदार?
नई दिल्ली. मनमोहन सिंह (EXCLUSIVE: खाली हो रहा मनमोहन का खजाना) की सरकार में मंत्रियों के करीब दर्जन भर पद कुछ हफ्तों से खाली हैं। अब इन्हें भरने की अटकलों ने फिर जोर पकड़ा है। दरअसल, प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने मंगलवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की। इसके बाद कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी राष्ट्रपति से मुलाकात की। मनमोहन सिंह और सोनिया ने प्रणब मुखर्जी से अलग-अलग जाकर करीब एक-एक घंटे तक बातचीत की। कांग्रेस (सलमान के ट्रस्ट ने जहां लगाए कैंप, उन गांवों का नहीं वजूद) के महासचिव राहुल गांधी ने भी बुधवार को अलग से राष्ट्रपति से मिलने के लिए समय मांगा। बुधवार को ही राहुल ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की। ('मुझे डिसमिस कर दो या चैन से नौकरी करने दो')
गौरतलब है कि प्रधानमंत्री ने सोमवार दोपहर राष्ट्रपति से भेंट की। सूत्रों के अनुसार, दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक, आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर करीब एक घंटे तक चर्चा हुई। शाम को यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भी करीब ४५ मिनट तक 'महामहिम' से बातचीत की। गौरतलब है कि राष्ट्रपति बनने से पहले प्रणब, कांग्रेस के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिकार थे। कई जीओएम के अध्यक्ष भी वे रह चुके हैं। सूत्रों के अनुसार, मनमोहन सरकार का कैबिनेट मंत्री पद संभालने के दौरान ही प्रणब तेलंगाना मुद्दे पर व्यापक नोट तैयार कर रहे थे। ऐसे समय जब सरकार तेलंगाना मुद्दे को सुलझाने की जद्दोजहद कर रही है, प्रणब की सलाह उसके लिए बेहद जरूरी है। (क्या होगा सलमान का?)
इस मुलाकात से मंत्रिमंडल में जल्द फेरबदल की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। इसके पीछे वजह भी है। राष्ट्रपति का १९ अक्टूबर की शाम को दुर्गा पूजा के लिए पश्चिम बंगाल स्थित अपने पैतृक गांव जाने का कार्यक्रम है। वे २३ अक्टूबर को वापस लौटेंगे। दूसरी ओर, प्रधानमंत्री और कांग्रेस अध्यक्ष २० अक्टूबर को राजस्थान दौरे पर हैं। इससे पहले १८ अक्टूबर को सोनिया मंगलोर दौरे पर जाएंगी और इसी दिन दोपहर में लौटेंगी। २० अक्टूबर के बाद पीएम और कांग्रेस अध्यक्ष, दोनों ही चुनावी दौरों में व्यस्त हो जाएंगे। सूत्रों के अनुसार, मंत्रिमंडल विस्तार की संभावनाएं इसी बीच हैं।
राहुल गांधी की राष्ट्रपति से मुलाकात को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। इस समय वह एक सांसद और कांग्रेस महासचिव हैं। ऐसे में पार्टी अध्यक्ष की मुलाकात के बाद महासचिव का राष्ट्रपति से मिलना अटकलबाजी की वजह बन रहा है। अटकलें हैं कि कांग्रेस में उनका कद बढ़ाया जा सकता है या फिर मनमोहन सिंह उन्हें अपना सहयोगी बना सकते हैं।
गौरतलब है कि कैबिनेट में फेरबदल जरूरी हो गया है। रेल मंत्री सहित तृणमूल के छह मंत्री सितंबर में इस्तीफा दे चुके हैं। विलासराव देशमुख के निधन के बाद से विज्ञान एवं तकनीक, 2जी घोटाले में ए. राजा के इस्तीफे के बाद दूरसंचार और सुशील कुमार शिंदे के गृह मंत्री बनने से ऊर्जा मंत्रालय पहले से ही खाली है। एक सीट प्रणब मुखर्जी के राष्ट्रपति बनने से भी खाली हुई है। दयानिधि मारन और वीरभद्र सिंह द्वारा छोड़े गए मंत्रालयों में भी कुर्सी खाली है।
सूत्रों का कहना है कि शशि थरूर और ज्योति मिर्धा जैसे नेताओं को मंत्री बनाया जा सकता है (मनमोहन सिंह सरकार के 5 'सिरदर्द')। इस फेरबदल में किसे मिल सकती है मंत्री की कुर्सी और किसे पार्टी की सेवा के नाम पर किया जा सकता है बाहर, पूरी संभावनाओं पर एक नजर:






