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झारखंड: राज्यपाल के सलाहकारों की नियुक्ति से केंद्र ने दिए सख्त संदेश

संतोष ठाकुर/प्रमोद कुमार सुमन | Jan 19, 2013, 11:28AM IST
 
 

 
नई दिल्ली. झारखंड में राष्ट्रपति शासन लागू हो गया है। प्रेस सचिव वेणु राजामणि ने बताया कि राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की सिफारिश मंजूर कर ली है। पश्चिम बंगाल के दौरे पर आए मुखर्जी ने कोलकाता में दस्तावेज पर शुक्रवार को दस्तखत किए।
 
 
राष्ट्रपति शासन पर राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की मंजूरी के बाद केंद्र सरकार ने राज्यपाल की मदद के लिए दो सलाहकारों की नियुक्ति की है। इन दोनों के चयन के साथ केंद्र सरकार ने ये संकेत दे दिए हैं कि वह झारखंड में अपनी ओर से किसी भी मोर्चे पर एक भी दिन की देरी नहीं करना चाहती है। यही वजह है कि उसने जहां पूर्व आईएएस अधिकारी व पूर्व केंद्रीय गृह सचिव मधुकर गुप्ता को सलाहकार के तौर पर नियुक्त किया है वहीं उसने दूसरे सलाहकार के तौर पर सीआरपीएफ के पूर्व महानिदेशक और पूर्व आईपीएस अधिकारी के. विजय कुमार का चुनाव किया है। गुप्ता ने 'भास्कर' से अपनी नियुक्ति की पुष्टि की।
 
 
 
मधुकर गुप्ता पहले उप्र कैडर के 1971 बैच के आईएएस अधिकारी थे। राज्य के विभाजन के बाद उत्तराखंड सरकार ने कुछ चुनिंदा अफसरों को उन्हें देने की मांग केंद्र सरकार से की थी। इसमें गुप्ता का भी नाम था। इस तरह वह उत्तराखंड कैडर में आ गए। उन्हें कांग्रेस का करीबी माना जाता है और पूर्व में वह रायबरेली के जिला अधिकारी भी रह चुके हैं। गुप्ता को उप्र में विकास कार्य के लिए रोल मॉडल माना जाता रहा है। यही वजह है कि केंद्र सरकार ने उन्हें दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) का उपाध्यक्ष नियुक्त किया। इसके बाद उन्हें केंद्रीय गृह सचिव के तौर पर नियुक्त किया गया। एनएसजी के कायाकल्प और सीआरपीएफ सहित सभी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों को धार देने के लिए सभी योजनाओं को गुप्ता ने ही आगे बढ़ाया। उन्हें लंबे समय बाद सरकार ने झारखंड में राज्यपाल के सलाहकार के तौर पर नियुक्ति देकर संकेत दिया है कि वह यहां विकास को गति देना चाहती है।
 
के. विजय कुमार से भी उम्मीदें 
इसी तरह के विजय कुमार को दूसरा सलाहकार नियुक्त कर केंद्र सरकार ने यह संकेत भी दिए हैं कि वह नक्सलियों से निपटने के मोर्चे पर भी राष्ट्रपति शासन के दौरान उदासीन नहीं रहना चाहती है। पूर्व सीआरपीएफ महानिदेशक के विजय कुमार को इस बल को नक्सलियों के मुकाबले में खड़ा करने और नक्सलियों पर बढ़त बनाने के लिए जाना जाता है। तमिलनाडु कैडर के 1975 बैच आईपीएस अधिकारी रहे के. विजय कुमार के नाम कुख्यात चंदन तस्कर वीरप्पन को मार गिराने का भी रिकार्ड है। उन्हें जंगल युद्ध कला का निपुण माना जाता है। विजय कुमार के समय में ही नक्सलियों के सबसे बड़े रणनीतिकार किशन जी को सीआरपीएफ ने मार गिराने में सफलता हासिल की थी और उसी समय से नक्सलियों की ताकत कम होती गई है। सेवानिवृति से पहले विजय कुमार ने झारखंड और विशेषकर सारांडा, झुमड़ा पहाड़ से नक्सलियों को खदेडऩे की विस्तृत योजना बनाई थी। वह अभियान शुरू कर पाते इससे पहले ही उनकी सेवानिवृति हो गई। माना जा रहा है कि बतौर सलाहकार वह इस 
अभियान को गति देंगे।  
 
 
 

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