यूपीए के लिए नया सिरदर्द, 3600 करोड़ के सौदे में 362 करोड़ की रिश्वत
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| Feb 13, 2013, 10:20AM IST

नई दिल्ली। वीवीआईपी के लिए इस्तेमाल होने वाले हेलिकॉप्टरों की खरीद में रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है। इटली पुलिस ने इस मामले में सोमवार को इतालवी रक्षा कंपनी फिनमेक्कानिका के सीईओ (मुख्य कार्यकारी अधिकारी) जिउसेप्पे ओरसी को गिरफ्तार किया है। उस पर 3,600 करोड़ रुपए के सौदे के लिए 362 करोड़ रुपए की रिश्वत देने का आरोप है। भारत में रक्षा मंत्रालय ने इस मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है।
यह सौदा 2010 का है। भारत ने इतालवी कंपनी फिनमेक्कानिका से 12 अगस्तावेस्टलैंड वीवीआईपी हेलिकॉप्टरों का सौदा किया था। इनमें से तीन भारत आ चुके हैं। शेष नौ अगले साल तक आने हैं। रक्षा मंत्रालय ने शेष की आपूर्ति पर रोक लगा दी है। इतालवी न्यूज एजेंसी अन्सा के अनुसार, ‘ओरसी को रोम में गिरफ्तार किया गया। उन पर अंतरराष्ट्रीय भ्रष्टाचार के आरोप हैं।’ अभियोजकों का अनुमान है कि सौदे की 10 प्रतिशत राशि करीब पांच करोड़ यूरो (362 करोड़ रुपए) रिश्वत के रूप में चुकाई गई। पुलिस ने मंगलवार को ओरसी के मिलान स्थित घर तथा कॉन्ट्रेक्टर के ऑफिस में तलाशी ली है। हालांकि, फिनमेक्कानिका ने बयान में कहा है कि कंपनी के प्रमुख निर्दोष हैं। जल्द ही सच्चाई सबके सामने आ जाएगी। इस घटनाक्रम का अन्य परियोजनाओं पर कोई असर नहीं होगा। इस कंपनी में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी इतालवी सरकार की है। अन्य खबरों में कहा गया है कि मजिस्ट्रेट ने अगस्तावेस्टलैंड के प्रमुख ब्रूनो स्पैग्नोलिनी को नजरबंद करने का आदेश जारी किया है। इटली सरकार ने स्विट्जरलैंड निवासी दो संदिग्ध दलालों के प्रत्यर्पण का आग्रह भी किया है। इधर भारतीय रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अगस्तावेस्टलैंड के साथ हुए करार में रिश्वत और प्रभाव का दुरुपयोग करने के खिलाफ कड़े प्रावधान हैं। इसमें कंपनी को हर्जाना भी देना पड़ सकता है।
इटली में पहले भी यह खबरें छपी थी कि फिनमेक्कानिका ने हथियारों के सौदों से अवैध तरीके से पैसा कमाया। इटली की राजनीतिक पार्टियों को रिश्वत दी। भारतीय हेलिकॉप्टरों की खरीद का मामला भी खबरों में था। इस पर भारत ने जांचकर्ताओं से संपर्क भी किया था। लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ा। संसद में रक्षा मंत्री एके एंटनी ने कहा था कि इटली से मामले की खास सूचना नहीं मिलने से औपचारिक जांच शुरू नहीं हो सकी थी।
यूपीए सरकार के लिए नया सिरदर्द
यूपीए सरकार के लिए वीवीआईपी हेलिकॉप्टरों की इतालवी कंपनी से खरीद में रिश्वत की खबर नया सरदर्द बन सकती है। यह खुलासा ऐसे समय हुआ है जब कांग्रेस इस साल कई राज्यों में विधानसभा चुनाव और 2014 में आम चुनाव की तैयारी में जुटी हुई है और बजट सत्र शुरू होने वाला है। जाहिर है विपक्ष को नया मुद्दा मिल सकता है।
हालांकि वीवीआईपी हेलिकाप्टरों के लिए पहला प्रस्ताव एनडीए के राज में आया था। मगर इसकी फाइलें आगे तब बढ़ी जब प्रणब मुखर्जी रक्षा मंत्री थे। और इस पर मुहर एके एंटनी के कार्यकाल में लगी। मुखर्जी तब वित्त मंत्रालय में पहुंच गए थे। यूपीए के कई रक्षा सौदे पहले से ही संदेह के दायरे में है। स्कॉर्पियन पनडुब्बी और टाट्रा ट्रक के मामलों की जांच सीबीआई के पास लंबित है। 197 हल्के हेलीकॉप्टरों के टेंडर रद्द करने के अलावा भी कई रक्षा सौदों पर संदेह उभरे हैं। रक्षा मंत्री एंटनी ने कहा कि कंपनी के आंतरिक ऑडिट की जानकारियां कोई खास तथ्य नहीं उजागर करती हैं। मंत्रालय एक दूसरे अधिकारी ने कहा कि सरकार इस पर ‘खुले दिमाग से सच्चाई’ का पता लगाना चाहती है। विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा,‘हमने इटली के दूतावास के जरिए इटली सरकार से इस मामले में सभी जानकारियां मुहैया कराने का अनुरोध किया है। अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है। उनकी दलील है कि इटली में यह न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है।’
इटली में मंगलवार को फिनमेक्कानिका कंपनी के प्रमुख जिउसेप्पे ओरसी की गिरफ्तारी 2010 में कंपनी द्वारा भारत को वीवी आई हेलीकॉप्टर के सौदे में भ्रष्टाचार की पड़ताल के तहत की गई है। यह पड़ताल कंपनी के सभी अंतरराष्ट्रीय सौदों की जांच का ही एक हिस्सा है। इसके अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकाप्टरों का सौदा भारत से हुआ था।
ओरसी की गिरफ्तारी के फौरन बाद रक्षा मंत्री एके एंटनी ने इस मामले में सीबीआई जांच के आदेश दे दिए हैं। सरकार का दावा है कि यह मामला जब से उजागर हुआ तभी से वह ब्रिटेन और इटली से ज्यादा जानकारियां मुहैया कराने की मांग कर रही थी मगर अभी तक उसे कुछ खास हासिल नहीं हुआ है। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता सितांशु कर ने कहा, ‘रक्षा मंत्रालय ने विदेश मंत्रालय के जरिए इटली और ब्रिटेन से यह जानकारियां मांगी थी, लेकिन अभी तक कोई खास जानकारी उपलब्ध नहीं हो पाई। अगस्ता वेस्टलैंड से सौदा इंटिग्रिटी पैक्ट के तहत हुआ था जिसमें किसी तरह के कमिशन या बाहरह हस्तक्षेप की गुंजाइश नहीं थी। इसलिए रक्षा मंत्रालय ने सीबीआई की जांच का फैसला किया है। ’ उनके मुताबिक इंटिग्रिटी पैक्ट के तहत रक्षा मंत्रालय हेलिकॉप्टर कंपनी द्वारा दी गई बैंक गारंटी को जब्त कर सकता है और हर्जाना ठोक सकता है।









