बाल विवाह पर नहीं लग पा रही है लगाम

नई दिल्ली. देश में अभी भी बाल-विवाह जैसी कुप्रथा पर लगाम नहीं लग पाई है। केंद्र की ताजा रिपोर्ट के अनुसार नौ बड़े राज्यों में अभी भी बाल-विवाह की दर काफी ऊंची है। रजिस्ट्रार जनरल ऑफ इंडिया (आरजीआई) की ओर से जारी ताजा वार्षिक स्वास्थ्य सर्वे के अनुसार राजस्थान में अभी भी ब्याही जाने वाली हर चार लड़की में एक की उम्र 18 साल से कम होती है।
इसी तरह बिहार और झारखंड में भी हर पांच में एक दुल्हन की उम्र 18 साल से कम पाई गई है। ताजा सर्वे स्वास्थ्य की दृष्टि से सबसे पिछड़े राज्यों मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ, झारखंड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, ओडीशा और असम के जिलावार आकंड़ों पर आधारित है।
सोमवार को जारी सर्वे के अनुसार राजस्थान में 21 प्रतिशत शादी-शुदा लड़कियों की औसत आयु 18 साल से कम पाई गई है। झारखंड में लगभग 18 प्रतिशत और मध्य प्रदेश में 13 प्रतिशत नाबालिगों की शादी हो चुकी है। उत्तर प्रदेश की 9 फीसदी और छत्तीसगढ 6 प्रतिशत बालिकाओं की शादी 18 साल से पहले हो रही है। कच्ची उम्र में लड़कों की शादी के आंकड़े भी कुछ कम नहीं हैं।
आंकड़ों के अनुसार राजस्थान के 30 और मध्य प्रदेश के 19 फीसदी लड़कों की शादी 21 साल से पहले करा दी जाती है। उत्तर प्रदेश में 17 और झारखंड में 14 प्रतिशत लड़कों की शादी उम्र सेे पहले हो रही है। आरजीआई आयुक्त सी. चंद्रमौलि का कहना है कि ग्रामीण इलाकों में अभी भी बच्चों की शादी कराने के मामले ज्यादा सामने आए हैं। आरजीआई आयुक्त ने आगे बताया कि मौजूदा 9 राज्यों के आंकड़े इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की 48 फीसदी आबादी इन्हीं में बसती है।
चार राज्यों में औसतन हर महिला के हैं तीन बच्चें
सरकार की ओर से परिवार नियोजन के तमाम कोशिशों के बावजूद आम परिवारों में बच्चों की संख्या में कोई खासा बदलाव नहीं आ पाया है। ताजा आंकड़ों से पता चला है कि राजस्थान, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश में हर महिला के औसतन तीन बच्चे हो रहे हैं।








