नई दिल्ली/रोम. हेलिकॉप्टर खरीद
घोटाले की जांच के लिए सीबीआई और रक्षा मंत्रालय की ज्वॉइंट टीम सोमवार को इटली जा रही है। इस टीम को रविवार को इटली रवाना होना था, लेकिन टीम की इटली रवानगी एक दिन टल गई है। सीबीआई अधिकारी के मुताबिक पहले इस टीम को रविवार को जाना था। लेकिन अभी कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी हैं। इसलिए अब टीम सोमवार को इटली रवाना होगी। दल में सीबीआई के डीआईजी स्तर के दो अधिकारी और एक कानून अधिकारी शामिल हैं। वहीं, रक्षा मंत्रालय के संयुक्त सचिव और अधिग्रहण मैनेजर (एयर) अरुण कुमार बल भी दल में शामिल हैं। टीम के लोग वहां इटली के सरकारी वकील से मिलेंगे। भारत ने फिनमैकेनिका की सहयोगी कंपनी अगस्तावेस्टलैंड से 12 हेलिकॉप्टर खरीदने का करार 3546 करोड़ रुपये में किया था। कंपनी पर सौदा तय करने के लिए भारत और इटली में 362 करोड़ की
घूस देने का आरोप है। (
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लेकिन बड़ा सवाल यह है कि सीबीआई और रक्षा मंत्रालय की संयुक्त टीम को इटली जाकर क्या हासिल होगा? चूंकि, भारतीय दूतावास ने इटली सरकार से मामले की जांच संबंधी दस्तावेज मांगे थे ताकि सीबीआई को मदद मिल सके। दूतावास को शनिवार को जवाब मिला। हेलिकॉप्टर घूस स्कैंडल की जांच में इटली से मदद मिलने की उम्मीदों को झटका लगा है। इटली की अदालत ने जांच के दस्तावेज साझा करने से मना कर दिया है। वजह गोपनीयता बताई जा रही है। मामले की सुनवाई कर रहे जज बूस्टो आर्सिजियो लूका ने जवाब में कहा है कि ‘इस अनुरोध का सकारात्मक जवाब देना संभव नहीं है। जांच अभी शुरुआती दौर में है। इससे जुड़े कागजात गोपनीयता के दायरे में हैं। अभी ये कागजात सिर्फ आरोपियों और उनके वकीलों को दिए जा सकते हैं। जब गोपनीयता की शर्तें खत्म हो जाएंगी, तब भारत की मांग पर विचार किया जा सकता है।’ (
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अभी जांच की प्रक्रिया पूरी तरह से शुरू भी नहीं हो पाई है कि कई जानकार सीबीआई की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर रहे हैं। हेलिकॉप्टर घोटाले को सामने आए एक हफ्ते से ज्यादा का समय बीत चुका है, लेकिन सीबीआई ने इस मामले में अभी तक एफआईआर तक दर्ज नहीं की है। अलबत्ता रक्षा मंत्रालय ने कुछ दिनों पहले सीबीआई में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई थी। इस मामले में सीबीआई के सूत्रों का कहना है कि शिकायत में किसी खास भारतीय शख्स या किसी खास कंपनी पर आरोप न होने की वजह से जांच एजेंसी आगे नहीं बढ़ पा रही है।
खबरों के मुताबिक सीबीआई का कहना है कि जब रक्षा मंत्रालय से इस मामले में इनपुट मांगा गया तो उन्हें कुछ खास हासिल नहीं हुआ। रक्षा मंत्रालय से सीबीआई को सिर्फ एक चिट्ठी और भारतीय-इतालवी मीडिया में छपी कुछ खबरों की कटिंग मिली है। सीबीआई सूत्रों का कहना है कि सिर्फ इतनी चीजों के आधार पर ही केस दर्ज नहीं किया जा सकता है।
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