विज्ञापन
 
Home >> National >> Latest News >> National >> Citing Delhi Prison Manual, Centre To Reject Afzal Family's Plea For His Body

घुसपैठिये पाकिस्‍तानी को सेना ने किया ढेर, पाक ने मांगी लाश

1 of 4 Photos
नई दिल्ली/श्रीनगर/जम्मू. संसद पर 2001 में हुए हमले के दोषी और बीते शनिवार को दिल्ली की तिहाड़ जेल में फांसी पर लटकाए गए अफजल गुरु के परिवार के लिए मुश्किलें खत्म होती नहीं दिख रही हैं। अफजल गुरु के शव की मांग कर रही उसकी पत्नी तबस्सुम और भाई की मांग को केंद्र सरकार दिल्ली जेल मैनुअल के आधार पर नामंजूर करने की तैयारी में है।
 
इस बीच, घाटी में अफजल गुरु की फांसी को लेकर तनाव है। सुरक्षा एजेंसियों के लिए शुक्रवार का दिन अहम है जब आशंका है कि जुमे की नमाज के बाद तनाव बढ़ सकता है। इसी के मद्देनजर कश्मीर घाटी में सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है। घाटी में तनावपूर्ण माहौल के बीच पाकिस्तान भी अपनी तरफ से अशांति फैलाने की पूरी कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान ने राजौरी जिले के नौशेरा सेक्टर में संघर्ष विराम का उल्लंघन किया। भारतीय जवानों ने एक घुसपैठिए को मार गिराया। पाकिस्तानी सेना की ओर से बताया गया है कि घुसपैठ में मारा गया शख्स उनका सैनिक था। पाकिस्तान ने उसके शव की मांग की है। भारतीय सेना ने कहा है कि घुसपैठिए के शव को पाकिस्तानी सेना के हवाले कर दिया जाएगा। वहीं, अफजल गुरु की दया याचिका ठुकराने वाले राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के पास गृह मंत्रालय ने सात मामले अंतिम फैसले के लिए भेजे हैं। इनमें नौ लोग दोषी हैं।
 
 
अफजल की पत्नी तबस्सुम ने गृह मंत्रालय को चिट्ठी लिखकर अपने पति के शव की मांग की है। इस चिट्ठी के साथ ही जम्मू कश्मीर सरकार की तरफ से भी एक चिट्ठी गृह मंत्रालय को भेजी गई है, जिसमें अफजल के शव को उसके परिजनों को सौंपने की मांग पर सकारात्मक तरीके से विचार करने की अपील की गई है। दोनों चिट्ठियां गृह मंत्रालय पहुंच चुकी हैं। लेकिन अफजल के शव की मांग कर रहे परिवार को निराश होना पड़ सकता है। दरअसल, केंद्र सरकार दिल्ली जेल मैनुअल के उस प्रावधान का सहारा लेकर इस मांग को ठुकराने की तैयारी में है, जिसके मुताबिक मानव शरीर, किसी की भी संपत्ति नहीं हो सकती है। अफजल गुरु को फांसी दिए जाने के तुरंत बाद ही जेल के भीतर दफना दिया गया था। 
 
दिल्ली जेल मैनुअल के मुताबिक किसी कैदी का शव उसके परिजनों या मित्रों को तभी सौंपी जा सकता है जब उस पर दावा अंतिम संस्कार से पहले किया गया हो। शव को दफनाने के बाद अगर मृत कैदी के परिवार वाले या दोस्त शव की मांग करते हैं तो इसे पुलिस कमिश्नर के पास भेजा सकता है। तब पुलिस कमिश्नर विभिन्न कारकों पर विचार करते हैं। इनमें अहम कारक हैं-क्या कैदी की मौत किसी छुआछूत की बीमारी से हुई है या उसकी मौत को कितना वक्त बीत चुका है और क्या उसका शव आसानी से सुरक्षित कब्र से बाहर निकाला जा सकता है या नहीं? इन सवालों के आधार पर ही कमिश्नर निर्णय लेता है। अगर जेल प्रशासन को यह लगे कि शव के अंतिम संस्कार के दौरान विरोध प्रदर्शन हो सकता है तो शव को दफन किए जाने के पहले भी जेल प्रशासन शव की मांग को ठुकरा सकता है। 
 
 
(तस्वीर: तिहाड़ के जेल नंबर 3 की तरफ जाने वाला रास्ता, जहां अफजल को दफ्न किया गया) 
 
 
आगे की स्लाइड में पढ़िए, अफजल गुरु की फांसी के बाद कैसे हैं कश्मीर में हालात: 
 
15 फरवरी की खास खबरें
 
 
 
अफजल से जुड़ीं खबरें पढ़ें: 
 

पीओके में उठी कश्‍मीर की आजादी की मांगअफजल की फांसी का 'बदलालेने की तैयारी शुरू

INSIDE STORY: 'चिंतनके बाद अफजल पर 'टॉप गियरमें आई थी सरकार!

फांसी के बाद नहीं छूट रहा अफजल के 'भूतसे पीछा

जानिएकिस तरह अफजल ने तिहाड़ में गुजारे 11 साल

गिटार पर गजल गाने वाले अफजल की जिंदगी का सचजानिए

 

आपकी राय

 

क्‍या अफजल का शव उसके परिवार को लौटा देना चाहिए, आप बताएं...


आपके विचार
 
 
कोड:
6 + 4

 
Ad Link
विज्ञापन
विज्ञापन
 
 
 
 
Sabse Bada Match Fixer Contest
 
 

बड़ी खबरें

रोचक खबरें

विज्ञापन

बॉलीवुड

जीवन मंत्र

क्रिकेट

बिज़नेस

जोक्स

पसंदीदा खबरें

Email Print Comment
Email Print Comment