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STING से शक के घेरे में आए पुरी, पारिख, चंदा और शिखा

dainikbhaskar.com | Mar 14, 2013, 15:28PM IST
 
 

 
नई दिल्ली. श्रीनगर के आतंकी हमलों पर सरकार की नाकामी के बावजूद सोनिया गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष बनने के 15 साल पूरे होने के जश्न में डूबी सरकार से नाराज लोग गुरुवार को बारिश की वजह से तीसरे टेस्ट मैच का मजा भी नहीं ले सके। वहीं अब एक स्टिंग ने देश के सामने बड़ा सवाल उठाया है कि क्या देश के तीन प्राइवेट नामी बैंक-एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और एक्सिस सरकार की नाक के नीचे काले धन को सफेद करने का कारोबार कर रहे हैं? यह सवाल कोबरापोस्ट के स्टिंग ऑपरेशन से हुए सनसनीखेज खुलासे के बाद उठ खड़ा हुआ है। कोबरापोस्ट ने एक स्टिंग ऑपरेशन के जरिए दावा किया है कि एचडीएफसी, आईसीआईसीआई और एक्सिस बैंक काला धन (ब्लैक मनी) को सफेद करने का काम बड़े पैमाने पर कर रहे हैं। स्टिंग में दिखाया गया है कि किसी किसी नेता के प्रतिनिधि होने का दावा करने वाला एक अनजान आदमी बैंक के अफसरों को यह समझाने में कामयाब होता है कि उन्हें ब्लैक मनी को सफेद करने के उपाय करने चाहिए। इसके बाद  बैंक के अफसर उस शख्स की बातों में आकर तमाम नियम कानूनों की धज्जियां उड़ाते हुए केवाईसी और पैन कार्ड के ब्योरे जैसी बुनियादी औपचारिकताएं पूरी किए बिना काले धन को सफेद करने में जुट जाते हैं। 
 
खतरनाक बात यह है कि स्टिंग किसी एक शाखा या किसी एक क्षेत्र में नहीं किया गया है बल्कि इसमें देश के अलग-अलग इलाकों में मौजूद बैंकों की शाखाओं का कच्चा चिट्ठा सामने लाया गया है।
 
अब सवाल उठता है कि अगर कोबरापोस्ट के स्टिंग को सही माना जाए (पहली नजर में इसके फर्जी होने की गुंजाइश भी नहीं दिखती है) तो क्या सरकार इन बैंकों से जुड़े मैनेजमेंट को कठघरे में खड़ा करेगी? क्या बैंकों के कामकाज पर नजर रखने वाला रिजर्व बैंक इस मामले में जरूरी कदम उठाएगा?
 
सवालों के घेरे में कौन-कौन
 
आदित्य पुरी 
 
कोबरापोस्ट के सनसनीखेज खुलासे के बाद एचडीएफसी बैंक के मैनेजिंग डाइरेक्टर आदित्य पुरी सवालों के घेरे में आ गए हैं। आदित्य पुरी को देश में बैंकिंग सेक्टर के अगुवा पेशेवरों में गिना जाता है और उन्हें कई अवॉर्ड भी मिल चुके हैं। एचडीएफसी बैंक ने अपनी कामयाबी पर एक किताब (बैंक फॉर द बक) भी छापी है। लेकिन ताजा खुलासे के बाद सवाल उठता है कि क्या आदित्य पुरी को अपनी कामयाबी के दौरान बैंक के कामकाज में गड़बड़ियों की जानकारी नहीं थी? अगर थी तो उन्होंने इसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए? और सबसे अहम सवाल क्या रिजर्व बैंक या केंद्र सरकार आदित्य पुरी से इस मामले में पूछताछ करेगी? 
 
दीपक पारिख
 
पद्म भूषण से सम्मानित दीपक पारिख एचडीएफसी के गैरकार्यकारी अध्यक्ष हैं। वे एचडीएफसी बैंक की कामयाबी की सबसे बड़ी वजह माने जाते हैं। इसके अलावा भारत सरकार की तमाम अहम आर्थिक समितियों की अगुवाई भी दीपक पारिख करते रहे हैं। तो क्या सरकार दीपक पारिख से उन सवालों को पूछेगी जो ताजा स्टिंग के बाद सामने आए हैं?
 
चंदा कोचर 
 
आईसीआईसीआई बैंक की एमडी और सीईओ चंदा कोचर, भारतीय उद्योग जगत और बैंकिंग के क्षेत्र में जाना माना नाम है। कोचर ने अपनी मेहनत, विश्वास और लगन से पुरुष प्रधान बैंकिंग क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। फॉर्च्‍यून मैगजीन ने चंदा कोचर को भारतीय बिजनेस की सबसे पावरफुल महिला करार दिया है।
 
शिखा शर्मा
 
एक्सिस बैंक की एमडी और सीईओ शिखा शर्मा भी बैंकिंग के क्षेत्र में जाना माना नाम है। एक्सिस बैंक ज्‍वाइन करने से पहले शिखा आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल की हेड के तौर पर काम कर चुकी हैं। 2009 में शिखा शर्मा को बिजनेस वुमन अवॉर्ड से सम्‍मानित किया जा चुका है। आईआईएम अहमदाबाद से एमबीए की डिग्री हासिल करने वाली शिखा शर्मा को एक्सिस बैंक ने दो करोड़ रुपए सालाना के वेतन पैकेज पर रखा है। शिखा को यह भारी भरकम पैकेज ऐसे वक्‍त मिला था जब जब पूरी दुनिया मंदी के दौर से जूझ रही थी। आईसीआईसीआई समूह में 28 साल काम करने वाली शिखा को ही बैंक के पर्सनल फाइनेंस कारोबार की नींव डालने का श्रेय दिया जाता है।
 
कोबरा पोस्‍ट के स्टिंग ऑपरेशन में पकड़े गए अधिकतर मैनेजर महिला बैंकर ही लगती हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि महिला बैंकर ही समस्‍या की जड़ हैं। लेकिन यह हकीकत है कि कई प्राइवेट बैंकों की कमान महिलाओं के हाथ में है। यदि प्राइवेट बैंकों में शीर्ष पर बैठे लोग ऐसा फैसला करते है जिससे लोगों को ब्‍लैक मनी सफेद करने में मदद मिलती है तो बैंक के आला मैनेजर इस जिम्‍मेदारी नहीं बच सकते हैं। अगर सबसे ऊपर बैठा मैनेजर ऐसी किसी जानकारी से इनकार करता है तो ऐसे ऑपरेशन हेड के बिल्‍कुल बाद वाले अधिकारी की मंजूरी के बिना नहीं किए जा सकते हैं।
 
चिदंबरम 
 
यूपीए-1 के कार्यकाल के दौरान तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम ने बैंकिंग कैश ट्रांजैक्शन टैक्स लागू किया था। इसके तहत एक दिन में 50 हजार रुपये से अधिक की राशि निकालने या जमा करने पर कुल रकम का 0.1 फीसदी टैक्स के रूप में चुकाना पड़ता था। मतलब अगर आपने एक दिन में एक लाख रुपये जमा किए हैं तो आपको 100 रुपये टैक्स जमा करवाना पड़ेगा। लेकिन 2009 के लोकसभा चुनाव से पहले इस टैक्स को हटा लिया गया। अब चिदंबरम फिर से वित्त मंत्री हैं। तो क्या वे इस टैक्स पर फिर से विचार करेंगे, जिससे काले धन की आवाजाही पर थोड़ा बहुत ही सही पर कुछ अंकुश लग सके?
 
 
आरोप झेल रहे बैंकों के पास लाखों करोड़ की पूंजी
 
कोबरा पोस्ट के स्टिंग में जो बैंक आरोपों के घेरे में हैं, उनमें शामिल आईसीआईसीआई बैंक की कुल पूंजी 31 मार्च, 2012 को 4.73 लाख करोड़ रुपये थी। दुनिया के 19 देशों में इसकी शाखाएं हैं। वहीं, 31 मार्च, 2012 को एचडीएफसी बैंक की कुल पूंजी 3.37 लाख करोड़ रुपये आंकी गई थी। उस समय बैंक के पास कुल 4.47 लाख से ज्यादा शेयरधारक थे। एक्सिस बैंक की कुल पूंजी 31 दिसंबर, 2012 को करीब 3.18 लाख करोड़ रुपये थी। 
 
 
 
स्टिंग का असर
 
स्टिंग ऑपरेशन के बाद सामने आए सच के नतीजे बेहद गंभीर हो सकते हैं। फंसे हुए लोन के बोझ तले दबे बैंकिंग सेक्टर के लिए स्टिंग के जरिए सामने आया सच बुरी खबर लेकर आया है। ताजा घटनाक्रम का असर इन तीनों बैंकों के अलावा तमाम अन्य निजी बैंकों की साख पर पड़ सकता है। इसके अलावा आम निवेशक या ग्राहकों का इन बैंकों से मोहभंग भी हो सकता है, जिसका सीधा असर बैंकिंग कारोबार पर पड़ने की आशंका है। स्टिंग का असर शेयर बाजार इन बैंकों के शेयरों पर भी पड़ सकता है। रिजर्व बैंक के अलावा आरोपी बैंकों को जिम्मेदारी के साथ अपना पक्ष रखना होगा। 
 
 

 

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