वैल्थ, पर उतनी कॉमन भी नहीं
कॉमन वाली वैल्थ घोटाले पर सरकार और कांग्रेस की जितनी फजीहत हो रही है, कम से कम दो नेताओं को उसमें खूब मजा आ रहा है। दोनों कांग्रेस के हैं, दोनों अफसरशाह रह चुके हैं। एक आईएएस और दूसरा आईएफएस। दोनों मंत्री रह चुके हैं, बल्कि मंत्री पद से हटाए जा चुके हैं। समझ गए न आप? अरे भई, अपने मणिशंकर अय्यर और एमएस गिल। सीडब्ल्यूजी घोटाले पर राज्यसभा में विपक्ष ने इन दोनों को भी लपेटा (क्यों, यह बाद में बताएंगे) और दोनों ने जरा भी विरोध नहीं किया। मणिबाबा एक बार खड़े हुए, लेकिन सिर्फ यह बोलने के लिए कि वह राज्यमंत्री नहीं, पूरे कैबिनेट मंत्री हुआ करते थे।
सेल्फ गोल पर भी फाउल
अब बात भाजपा की। भाजपा को येदियुरप्पा को हटाने के लिए कितने पापड़ बेलने पड़े, भाजपा वाले ही जानते हैं। एक पापड़ के दर्शन हम आपको करा देते हैं। जब जगदीश शेट्टार और सदानंद गौड़ा के बीच पेनाल्टी शूट या सीक्रेट वोट हो रहा था, तो जानते हैं येदियुरप्पा ने किसके पाले में गोल दागा? उन्होंने पर्ची पर अगले सीएम के तौर पर अपना ही नाम लिख मारा। रेफरियों ने इसे फाउल करार दिया, तब जाकर येदियुरप्पा ने सदानंद गौड़ा का नाम लिखा। अंतिम सांस तक लड़ना इसे कहते हैं।
फोटूजी की खातिर
वैसे राजनेता अमूमन किसी के दोस्त या दुश्मन नहीं होते,लेकिन आडवाणी से दूरी दिखाने का लालू प्रसाद यादव कोई मौका नहीं चूकते हैं। कभी दुआ-सलाम भी होती है, तो बस दूर से ही। आडवाणी पर लालू अपनी स्टाइल में कटाक्ष भी करते रहते हैं। लेकिन इस बार स्पीकर की बुलाई मीटिंग में संयोग से दोनों साथ ही घुसे। कैमरे तैनात थे। फिर क्या था, लालू प्रसाद ने लपककर आडवाणी से हाथ मिला लिया। कई साल में पहली बार। सिर्फ फोटो की खातिर। नो पॉलिटिक्स। कम से कम अभी तक नहीं।
नौ चार तेरह
13 का आंकड़ा ममता बनर्जी को खूब फला है। 13 मई को ममतादी सीएम बनीं, देश की १३वीं महिला मुख्यमंत्री। 1998 में तृणमूल कांग्रेस बनाने के 13 साल बाद। 2001 के विधानसभा चुनावों की मतगणना 13 मई को हुई थी और 2004 के आम चुनावों की भी। इस साल चार विधानसभाओं के वोट पड़े 13 अप्रैल को और मतगणना हुई 13 मई को। लेकिन 13 का आंकड़ा सिर्फ ममता को नहीं फला है। प्रणबदा भी वर्षो से 13,तालकटोरा स्टेडियम में रह रहे हैं और मायावती के भी 5, कालिदास मार्ग का बंगला छोड़कर वापस 13, मॉल एवेन्यू के बंगले में जाने की चर्चा है।
हे गुरुदेव
गुरुदेव रबींद्रनाथ टैगोर की 70वीं पुण्यतिथि पर ममता बनर्जी के कार्यक्रम में कोलकाता तो जैसे झूम ही पड़ा था। लेकिन जानते हैं, दिल्ली में मुलायम सिंह यादव ने इस बात पर हैरत जताई कि ‘सिर्फ कुछ कविताएं लिखने वाले’ टैगोर इतने प्रसिद्ध क्यों हैं। इस पर तृणमूल के नेता सुदीप बंदोपाध्याय संसद की लाइब्रेरी से टैगोर पर एक पुस्तिका लाए और मुलायम सिंह को थमा दी। एक कॉपी लालू प्रसाद को भी दी गई।
क्या खूब जमेगा रंग
गलियारों के चुटकुलों में एक नया गठबंधन बना है। इसमें मनमोहन सिंह हैं, जो बोल नहीं पाते; येदियुरप्पा हैं, जो सुन नहीं पाते; मायावती हैं, जिन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता; करुणानिधि हैं, जो देख नहीं पाते; और कलमाडी हैं, जिन्हें कुछ याद नहीं रहता।
मामा की ईमानदारी
पेट्रोलियम विभाग में संयुक्त सचिव अपूर्व चंद्रा को मंत्री जयपाल रेड्डी की नाराजगी के कारण वापस कार्मिक विभाग भेज दिया गया है। कम ही लोग जानते हैं कि अपूर्व चंद्रा नए सतर्कता आयुक्त प्रदीप कुमार के भांजे हैं। अब अगर मामाजी चाहते, तो भांजे का तबादला आराम से रुकवा लेते। लेकिन नहीं रुकवाया।
‘डिजिटल’ युग
सुप्रीम कोर्ट के बार में उस बात को लेकर खुसरपुसर शुरू हो गई है,जिसे महसूस सब करते हैं,पर कहता कोई नहीं था। वह यह कि 1980 के बाद से सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में कानूनी बिंदु कम होते जा रहे हैं और तारीखें,आंकड़े वगैरह बढ़ते जा रहे हैं। शायद इस खुसरपुसर का असर हो।
अब सब ठीक है
एनडीएमसी में नए प्रशासक के आने से सबसे ज्यादा खुशी शिक्षा के महकमे में है। पहले शिक्षा विभाग वालों को अपनी निदेशिका को ढूंढ़ने में बहुत वक्त लगाना पड़ता था। मैडम इसके पहले इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय में संयुक्त रजिस्ट्रार होती थीं। अब सब ठीक है।
शिवराज का उमा फैक्टर
उमा भारती के भाई स्वामी लोधी पिछले दिनों भोपाल के चिरायु अस्पताल में भर्ती थे और जानते हैं, उनका हालचाल पूछने खुद सीएम शिवराज सिंह चौहान अस्पताल पहुंचे। यह उमा भारती के प्रेम का असर था या प्रभाव का, यह पता नहीं चला।
बढ़ती रहे बिरादरी
सुप्रीम कोर्ट में तीन जज एक ही शहर और एक ही बिरादरी के हैं। इसी वजह से उसी शहर के उसी बिरादरी के वकीलों की मांग जोरों पर है।
क्यों रुका तबादला?
जम्मू-कश्मीर कैडर के 1988 बैच के आईएएस अधिकारी एस नायक फिलहाल ज्वाइंट सेक्रेटरी माइंस हैं। उनके लेटरल ट्रांसफर को प्रधानमंत्री ने निरस्त कर दिया। चर्चा है कि नायक ने अपने ही महकमे के सचिव मिस्टर विजयकुमार के खिलाफ कैबिनेट सेक्रेटरी को शिकायत भेजी थी।
देवड़ा का ‘विस्तार’
एक ‘विस्तार’ नामक नया एनजीओ गठित किया गया है, जिसका जिम्मा पूर्व केंद्रीय मंत्री मुरली देवड़ा को सौंपा गया है। कहा जा रहा है कि यह एनजीओ कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के मार्गदर्शन में काम करेगा।